चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन के मास्टर प्लान-2031 के तहत प्रस्तावित वर्टिकल ग्रोथ को लेकर शहर के उद्यमियों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि वर्टिकल ग्रोथ समय की जरूरत है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त एफएआर मुफ्त दिया जाना चाहिए ताकि उद्यमियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और उद्योगों का विकास भी संभव हो सके। उद्यमियों ने पुनर्विकास नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की नीति व्यावहारिक रूप से लागू हो सकेगी और उद्योगों का काम प्रभावित नहीं होगा।
मामले को लेकर चंडीगढ़ के कोर ग्रुप के उद्यमियों की बैठक मंगलवार को बुलाई गई है। बैठक में मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर चर्चा के बाद प्रशासन के समक्ष आपत्तियां दर्ज करवाई जाएंगी। कुछ उद्यमियों ने छोटे प्लॉटों के लिए कम से कम 70 फीसदी कवरेज की मांग की है जबकि प्रशासन ने ड्राफ्ट में इसे 60 फीसदी प्रस्तावित किया है। उद्यमियों ने कहा कि प्रशासन औद्योगिक क्षेत्र में सर्विस इंडस्ट्री को बढ़ावा दे, लेकिन प्राथमिकता उद्योग जगत से जुड़ी सर्विस प्रोवाइडर इकाइयों को मिले। इनमें लोहे की चादरों, पाइप, हार्डवेयर इंडस्ट्री और कार रिपेयर व स्पेयर एसेसरीज फिटिंग जैसे व्यवसाय शामिल हैं, जिन्हें अधिक जगह की आवश्यकता होती है और शहर में अन्य स्थानों पर इनका संचालन संभव नहीं है।
चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा कि इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 के लिए प्रस्तावित संशोधन बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत वर्टिकल ग्रोथ के लिए तैयार है, लेकिन अतिरिक्त एफएआर पर शुल्क लगाने से पुनर्विकास अव्यावहारिक हो जाएगा। साथ ही 1900 चालू इकाइयों के लिए ऐसी चरणबद्ध पुनर्विकास और अस्थायी स्थानांतरण नीति बनाई जाए, जिससे उद्योग बंद न हों और रोजगार सुरक्षित रहें।
छोटे प्लॉट के लिए ग्राउंड कवरेज 70 फीसदी मिले
प्रशासन को छोटे प्लॉट के लिए ग्राउंड कवरेज कम से कम सत्तर फीसदी देनी चाहिए जिससे कि काम करने की जगह मिले। यदि पांच से दस मरले के प्लाॅट में 40 फीसदी छोड़ देंगे तो काम करने लायक जगह बचेगी ही नहीं। इसी वजह से मंगलवार को कोर ग्रुप के उद्यमियों की मीटिंग बुलाई है जिसमें मास्टर प्लान में उद्योग जगत को लेकर चर्चा की जाएगी। -अवि भसीन, प्रेसीडेंंट, लघु उद्योग भारती
किफायती फीस होनी चाहिए
ढाई एफएआर बेहतर है पर जरूरी यह है कि पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर ही उसकी किफायती फीस होनी चाहिए जिससे कि आम उद्यमी इसे करवा सकें। यदि फीस ज्यादा होगी तो लोगों को परेशानी होगी। -अक्षय चुग, उद्यमी
उद्यमियों और शहर को मिलेगा लाभ
सर्विस इंडस्ट्री को जगह देने में सबसे पहले उन उद्योगों को यहां जगह देना चाहिए जो कि उद्योग जगत से सीधे जुड़ी हुई हैं। इसका लाभ उद्यमियों और शहर को भी होगा। -मनीष निगम, उद्यमी