पूर्व डीसी की पीए से एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड में सीनियर असिस्टेंट बनने के बाद सुर्खियों में आईं पूनम मलिक को बर्खास्त कर दिया गया। उपायुक्त एसबी दीपक कुमार की जांच रिपोर्ट पर यह कार्रवाई की गई है।
उनकी नियुक्ति को पूर्व डीसी मोहम्मद शाईन की मेहरबानी माना जा रहा था और मामले के तूल पकड़ने पर मोहम्मद शाईन को कार्यकाल खत्म होने से पहले मूल राज्य हरियाणा भेज दिया गया था और इसकी जांच दीपक कुमार को सौंपी गई थी।
दीपक एग्रीकल्चर मार्केंटिंग बोर्ड के सचिव भी हैं। सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति में कई विसंगतियां हैं और पूर्व डीसी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
ये गड़बड़ियां मिलीं
सूत्रों के अनुसार पूनम मलिक से जुड़ा रेडक्रास का सारा रिकार्ड भी जांचा गया। मार्केंटिंग बोर्ड में उनकी नियुक्ति के मामले में पाया गया कि सीनियर असिस्टेंट के रिक्त पद के लिए न तो कई विज्ञापन सर्कुलेट किया गया और न ही पूनम मलिक के अलावा किसी अन्य ने इस पद के लिए आवेदन किया। इसे एक बड़ी गड़बड़ी माना गया।
गत 15 जनवरी को पूनम को इस पद पर नियुक्त किया गया था। इसके एक सप्ताह में ही उन्हें चंडीगढ़ मार्केट कमेटी का सचिव भी बना दिया गया। दूसरी ओर नियम के मुताबिक असिस्टेंट और सीनियर असिस्टेंट के पद पर कम से कम 12 साल का अनुभव रखने वाला ही मार्केटिंग कमेटी का सचिव नियुक्त किया जा सकता है।
प्रवर्तन निदेशालय में जाएगा मामला
भाजपा के वाइस प्रेसीडेंट रामबीर भट्टी ने स्पष्ट किया है कि अब वह पूनम मलिक का मामला प्रवर्तन निदेशालय को सौंपेंगे। उन्होंने दो माह पहले पूनम मलिक के खिलाफ शिकायत दी थी। जिस पर प्रशासक ने पूनम मलिक के खाते में 67 लाख रुपये कहां से आए और उसे निकाला कैसे गया, इसकी विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं।
रामबीर भट्टी ने अपनी शिकायत में बताया है कि पूनम मलिक ने चंडीगढ़ स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक को इतनी जल्दी लोन का 25 लाख रुपए कैसे चुकता कर दिए।
पूनम मलिक की नियुक्ति में धांधली पाई गई है। उनको टर्मिनेट कर दिया गया है।
- एसबी दीपक कुमार, उपायुक्त, चंडीगढ़