हरियाणा के ऊर्जा एवं वन मंत्री कैप्टन अजय यादव ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने साथियों को भी इस तरह का कदम उठाने की सलाह दी है। मंगलवार को उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री हुड्डा को सौंपा।
कैप्टन ने इस्तीफा देने की वजह सभी जिलों का समान विकास नहीं होने और सरकार में खुद को उपेक्षित होना बताया है। हालांकि यादव ने साफ किया कि उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है, पार्टी से नहीं। यादव ने कहा कि पूरे राज्य में सिर्फ तीन जिलों में ही सरकार की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है। शेष सभी जिले उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं।
न सिर्फ विकास कार्य बल्कि बेरोजगारों को नौकरियां देने के मामले में भी कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य के युवा अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। लिहाजा देर से ही सही लेकिन इस्तीफे का निर्णय करके सही कदम उठाया है। उन्होंने राज्य के अन्य मंत्रियों से भी इस्तीफा देने की अपील की है।
इस्तीफे पर कैप्टन ने कही अपनी बात
इस्तीफे के बाद कैप्टन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्होंने यह कदम पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया है। इस फैसले से कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में और मजबूत होगी।
उन्होंने बताया कि वे पार्टी नहीं छोडे़गे। अगर पार्टी आलाकमान आगामी विधानसभा चुनाव मे उतारना चाहेगी तो वे तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वे सोनिया गांधी को अपना नेता मानते हैं। पार्टी आलाकमान से कोई शिकायत नहीं है। यादव ने कहा कि इस्तीफा देने के कई ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय दो साल पहले भी लिया था। लेकिन इस उम्मीद में इस्तीफा नहीं दिया कि राज्य में सब कुछ ठीक हो जाएगा। सरकार सभी जिलों का समान विकास करेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पूरे राज्य में सिर्फ तीन जिलों में ही सरकार की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है। शेष सभी जिले उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं।
न सिर्फ विकास कार्य बल्कि बेरोजगारों को नौकरियां देने के मामले में भी कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य के युवा अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। लिहाजा देर से ही सही लेकिन इस्तीफे का निर्णय करके सही कदम उठाया है। उन्होंने राज्य के अन्य मंत्रियों से भी इस्तीफा देने की अपील की है।
बिना कारण बताए वित्त विभाग वापस लिया
कैप्टन अजय ने बताया कि वे कांग्रेस के वफादार सिपाही हैं। बीते ढाई दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस से जुड़े हैं और पार्टी के लिए पूरे दिल से काम कर रहे हैं। लेकिन सरकार में रह कर घुटन महसूस हो रही थी।
यादव के मुताबिक बीते तीन वर्षों से लगातार हुड्डा सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। उन्होंने यह भी बताया बिना कारण बताए उनसे वित्त विभाग भी ले लिया गया था। उस वक्त पार्टी ने भरोसा दिया था कि यह अस्थायी व्यवस्था है। जल्द ही सब ठीक हो जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
गौरतलब है कि यादव छह बार से विधायक हैं। उन्हें हुड्डा के आलोचकों में से एक माना जाता है। यादव कई बार हुड्डा की नीतियों और उनके काम करने के तरीके की आलोचना कर चुके हैं। हालिया लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस ने उन्हें गुड़गांव से पार्टी उम्मीदवार नहीं बनाया तो उन्होंने इनकार करते हुए अपने बेटे को टिकट दिए जाने की मांग की थी। लेकिन उनकी इस मांग को पार्टी आलाकमान ने ठुकरा दिया था।
अहीरवाल क्षेत्र में कांग्रेस का दूसरा झटका
राव इंद्रजीत के पार्टी छोड़ने के बाद अहीरवाल क्षेत्र में कांग्रेस को यह दूसरा बड़ा झटका है। कैप्टन यादव को हरियाणा कांग्रेस का एक मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है।
अहीरवाल क्षेत्र में उनकी पकड़ काफी मजबूत है। उन्हें कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होकर सांसद बने राव इंद्रजीत सिंह का करीबी माना जाता है और कयास लगाया जा रहा है कि वे गुड़गांव से अपने बेटे को लोकसभा का चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने से नाराज थे।