सोमवार का दिन शहर में आंदोलन और रोष प्रदर्शन के नाम रहा। दो प्रमुख सरकारी महकमों शिक्षा और पुडा में मुलाजिमों ने काम बंद करके रोष प्रदर्शन किया। इसके चलते इन विभागों में अपने कामों के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में आए लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। काम न होने से लोग परेशान हुए।
लंबे समय से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे पुडा मुलाजिमों ने सोमवार को कलम छोड़ हड़ताल की। इससे पुडा भवन की विभिन्न शाखाओं मे काम पूरी तरह रुक गया।
विभिन्न कामों से पुडा आने वाले सैकड़ों लोगों को निराश होकर घर लौटना पड़ा। पुडा मुलाजिम तालमेल संघर्ष कमेटी ने साफ किया है कि जल्दी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक पुडा मुलाजिम सुबह तय टाइम में ऑफिस में पहुंच गए थे। हालांकि उन्होंने अपना काम पूरी तरह बंद रखा। इस दौरान सिंगल विंडो तक पर भी कोई भी मुलाजिम तैनात था।
केवल कलम छोड़ हड़ताल का एक पोस्टर वहां पर लगाया गया था। जिसे पढ़कर लोग को निराश होकर लौटना। इसके अलावा अन्य शाखाओं की स्थिति भी ऐसी रही। सबसे ज्यादा परेशानी एस्टेट ऑफिस, जमीन एक्वायर शाखा, बिल्डिंग ब्रांच, एकाउंट शाखा व अन्य शाखाओं में आने वाले लोगों को उठानी पड़ी।
इस दौरान में पुडा तालमेल कमेटी के मेंबरों ने पुडा भवन के गेट पर जमकर रोष प्रदर्शन किया। इसके अलावा राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित पुडा की इकाईयों में मुलाजिम कलम छोड़ हड़ताल पर रहे। मंगलवार से मुलाजिम दोपहर में रोजाना गेट रैलियां करेंगे।
यह मागे हैं मुलाजिमों की
पुडा मुलाजिमों को पेंशन लागू करना
रहते मुलाजिमों को प्लॉट अलॉट करना
मुलाजिमों के सेवाकाल में एक साल की वृद्धि करना
डेली मुलाजिमों को रेगुलर करना
योग्यता रखते दर्जा चार मुलाजिमों को प्रमोशन देना
शिक्षा विभाग के मुलाजिम संघर्ष पर, काम ठप्प
शिक्षा विभाग के मुख्य दफ्तर व विभिन्न जिलों में तैनात एसएसए एवं रमसा नॉन टीचिंग स्टाफ भी संघर्ष की राह पर आ गया। सोमवार को मुलाजिमों ने फेज-8 स्थित शिक्षा विभाग के आफिस के बाहर स्थाई धरना शुरू किया।
साथ ही तय किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं। तब तक वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे। दूसरी तरफ मुलाजिमों के फैसले से शिक्षा विभाग को काम पूरी तरह रुक गया। शिक्षा विभाग आने वाले सैकड़ों लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
शिक्षा विभाग के विभिन्न दफ्तरों में तैनात एसएस-रमसा नॉन टीचिंग स्टाफ सोमवार को शिक्षा विभाग के ऑफिस पहुंचा। इसके बाद उन्होंने शिक्षा विभाग के आफिस के बाहर बैठकर अपना स्थाई आंदोलन शुरू किया।
स्टाफ में अधिकतर मुलाजिम अपने परिवार संग पहुंचे। इसमें महिला व पुरुष दोनों थे। पुलिस ने स्थित को संभालने के लिए धरना स्थल पर महिला पुलिस, कमांडों व अन्य पुलिस जवान तैनात कर दिए थे।
दोपहर तक मुलाजिम शिक्षा विभाग के गेट पर डटे रहे। इसके बाद मुलाजिमों ने फेज-7 तक शांतमय तरीके से रोष मार्च निकाला। साथ ही वहां पहुंचकर सरकार की मुलाजिम विरोधी नीतियों के पोस्टर लोगों को बांटे।
नॉन टीचिंग स्टाफ की मांग है कि उन्होंने एसएसए व रममा टीचरों की तरह मासिक बेतन दिया जाए। जिसे सरकार पूरी नहीं कर रही है। मुलाजिमों ने बताया कि 500 के करीब लोग पूरे राज्य से शिक्षा विभाग के मुख्य आफिस में रोजाना आते हैं।
जिन्हें निराशा होकर लौटना पड़ा है। संघर्ष के चलते शिक्षा विभाग की अगले साल की प्लानिंग, मुलाजिमों के बेतन व शिक्षा से संबंधित सारे काम प्रभावित हो रहे हैं।
बेरोजगार शारीरिक अध्यापक भी सरकार के खिलाफ संघर्ष की राह पर आ गए। सोमवार को टीचरों ने शिक्षा विभाग के गेट पर अपनी डिग्रियां जलाईं। विभिन्न टूर्नामेंट में जीते मैडल गेट पर लटका दिए। टीचरों का कहना है कि अब इनका उनके जीवन में कोई महत्व नहीं रह गया। पढ़ लिखकर उन्हें धक्के खाने पड़ रहे हैं।
अध्यापकों ने बेरोजगार डीपीई/एमपीएड यूनियन के बैनर तले अपना संघर्ष शुरू किया है। अध्यापकों ने बताया कि राज्य सरकार ने काफी समय पहले 645 डीपीई व 25 लेक्चरर पदों को भरने की तैयारी की थी।
लेकिन अभी तक भी यह मामला अधर है। दूसरा पढ़ लिखकर भी टीचर बेकार घूम रहे हैं। जबकि स्कूलों में टीचरों के पद खाली पड़े हुए हैं। इससे आने वाली युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है।
टीचरों ने आरोप लगाया गया कि एक तरफ सरकार खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए कबड्डी कप रहा है। जिस पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। टीचरों ने साफ किया कि उन्होंने स्थाई धरना शुरू कर दिया है। जल्दी मांगे नहीं मानी गई, तो टीचर भूख हड़ताल शुरू कर देंगे।