छात्र संघ चुनाव लड़ने के लिए विद्यार्थी भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं। कोई इंजीनियरिंग लाइन को छोड़कर उर्दू विभाग में एडमिशन ले रहा है तो कोई अन्य विषयों में। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। हालांकि पढ़ाई किसी भी विषय से की जाए वह व्यर्थ नहीं जाती है, लेकिन यह बात विद्यार्थियों को शुक्रवार को नामांकन के दौरान पता चली तो सब हैरत में थे।
छात्र संगठन सोई के अध्यक्ष पद उम्मीदवार चेतन ने पीयू से बीटेक किया है। उन्होंने एमटेक में एडमिशन लेने के लिए अप्लाई किया और मेरिट का इंतजार करने लगा, लेकिन पता चला कि एडमिशन लिस्ट में नाम नहीं आया। वेटिंग लिस्ट में पहले नंबर पर नाम दर्ज किया गया। दिन बीत रहे थे और चेतन की धड़कनें बढ़ रही थीं।
चिंता सता रही थी कि एडमिशन नहीं मिला तो चुनाव लड़ने का सपना टूट जाएगा। आखिर तक नंबर बीटेक में नहीं आया। भविष्य की भी चिंता थी, लेकिन चुनाव लड़ना था। चेतन ने दूसरे विभागों की लिस्ट खंगालना शुरू कर दी जहां पर सीटें खाली थीं। उन्होंने उर्दू विभाग में आवेदन किया और एडमिशन ले लिया। इसी के तहत उन्होंने शुक्रवार को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कराया और छात्रों को पता लगा कि वह उर्दू से पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि कुछ विद्यार्थी इस बात को जानते भी थे।
चेतन की शिकायत पर ही पूर्व डीएसडब्ल्यू ने जारी किए थे आदेश
पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर को चेतन ने एक शिकायती पत्र दिया था कि हॉस्टलों में ट्रांसपरेंसी की जाए। उसके बाद डीएसडब्ल्यू ने सभी हॉस्टल में हर माह ऑडिट कराने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि यह आदेश विवादों में है। इसको फोलो करने के लिए पीयू को हर माह 50 हजार रुपये अपने खाते से देने होंगे।
एमटेक की वेटिंग लिस्ट में मेरा नाम है, वहां एडमिशन की अभी संभावना है। उर्दू में एडमिशन इसलिए लिया कि चुनाव लड़ सकूं। हमारे काफी वोटर हैं। एलायंस भी किसी से किया जा सकता है।
- चेतन, सोई से अध्यक्ष पद उम्मीदवार