जब कई जवान घर में बैठकर वोट डालने की सोच रहे थे तब तक 101 साल की जमना देवी अरोड़ा वोट डालकर आ चुकी थीं। सेक्टर-50 की रहने वाली जमना ने सुबह 9 बजे ही वोट डाल दिया था।
उसके बेटे दलजीत अरोड़ा ने बताया कि वे उन्हें मतदान केंद्र तक तो गाड़ी में लेकर गए थे, लेकिन आगे वह खुद सीढ़ियां चढ़कर ही गई। ईवीएम तक भी वह खुद ही गईं और उन्होेंने किसी की मदद भी नहीं ली। उन्होंने बनाया कि मां वोट के महत्व को अब भी जानती हैं।
दलजीत ने बताया कि उनकी मां का जन्म 1913 में लायलपुर चेक नंबर-28 (पाकिस्तान) में हुआ था। आजादी के बाद वह शाहकोट, जालंधर में आ गई थीं।
उन्होंने पहली बार 1948 में वोट डाला था और अब तक करीब 15 बार वह मतदान कर चुकी हैं। चंडीगढ़ में वे करीब 25 साल पहले आ गई थीं, लेकिन ज्यादातर वह अपने दूसरे बेटे के पास जालंधर में ही रहती थीं। वह हमेशा जालंधर में ही मतदान करती रही हैं। चंडीगढ़ में उन्होंने पहली बार वोट डाला। करीब दो साल पहले उनकी चंडीगढ़ में वोट बनी थी।