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बरोदा उपचुनावः कमल और पंजे की लड़ाई में चश्मा बढ़ा रहा रोमांच, प्रचार आखिरी दौर में

Sun, 01 Nov 2020 12:47 PM IST
दुष्यंत शर्मा प्रवीण पाण्डेय, बरोदा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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बरोदा उपचुनाव अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है। हलके की फिजा पूरी तरह चुनावी है। पहलवान बाजी मारेगा, कांग्रेस का ‘भालू’ जीत का स्वाद चखेगा या फिर इनेलो के जोगेंद्र सिंह मलिक विजय परचम लहराएंगे, हर तरफ इसकी ही चर्चा है। कमल और पंजे की लड़ाई में चश्मे ने रोमांच बढ़ा दिया है। भाजपा-जजपा, कांग्रेस के दिग्गजों के साथ ही इनेलो की तरफ से पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने खुद प्रचार की कमान संभाली हुई है। वह अपने राज में हुए कामों की दुहाई जनता को दे रहे हैं।

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भाजपा गठबंधन सहयोगी जजपा के साथ मिलकर अब तक उनके लिए बंजर रही बरोदा की धरती पर कमल का फूल खिलाना चाह रही है। जींद उपचुनाव में भी भाजपा ने मनोहर लाल सरकार के पहले कार्यकाल में 52 साल में पहली बार कमल खिलाया था। अब पार्टी बरोदा को भी भगवा रंग में रंगना चाह रही है। जबकि, कांग्रेस ने इस सीट को अपने कब्जे में रखने के लिए पूरा जोर लगाया हुआ है। हुड्डा पिता-पुत्र के अलावा अन्य कांग्रेस दिग्गज भी दिन रात प्रचार में डटे हैं। इनेलो ओपी चौटाला के दम पर करिश्माई प्रदर्शन की आस लगाए हुए है। 

कांग्रेस ने यह सीट छह बार, इनेलो-लोकदल ने छह बार व अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी एक-बार जीती है। बीते तीन चुनाव से यहां कांग्रेस जीतती आ रही है। कांग्रेस फिर यहां जीतना चाहती है तो भाजपा उसके जबड़े से जीत छीनने का दम भर रही है। सीएम मनोहर लाल के बाद डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला भी शुक्रवार को चुनावी रण में उतर गए। बरोदा की सरदारी जनता किसे सौंपती है, यह 9 नवंबर को चुनाव नतीजा साफ कर देगा।
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बरोदा लिखेगा नया इतिहास : मनोहर लाल
सीएम मनोहर लाल का कहना है कि इस चुनाव में बरोदा की जनता नया इतिहास लिखेगी। यह चुनाव विकास बनाम भ्रामक प्रचार का है। कांग्रेस ने हमेशा बरोदा की अनदेखी की है। भाजपा ने हलके की सुध ली है। उन्हें पूरा विश्वास है, जनता विकास को चुनेगी।

राजनीति की दशा-दिशा बदलेगा उपचुनाव : हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उपचुनाव कई बार ऐसी परिस्थितियों में होता है कि वह प्रदेश की राजनीति की दशा और दिशा बदल देता है। बरोदा में भी उसी तरह का चुनाव है इस चुनाव की काफी अहमियत है। हमारा उम्मीदवार कमजोर नहीं, बहुत मजबूत है। वह गरीब आदमी व किसान का बेटा है और हमारा पुराना वर्कर है। 

यह इनेलो का गढ़, भाजपा मुकाबले में नहीं : अभय
इनेलो नेता अभय चौटाला का कहना है कि यह कांग्रेस का नहीं, इनेलो का गढ़ है। लगातार पार्टी यहां 2005 तक चुनाव जीतती आई है। पिछले तीन चुनाव जो हम हारे हैं, इसमें पार्टी की नहीं बल्कि उम्मीदवार की तरफ से कहीं ना कहीं कोई कमी थी। यहां भाजपा कहीं मुकाबले में नहीं है। हुड्डा ने यहां 10 साल कोई काम नहीं किया, सिर्फ वादे किए। 31 अक्तूबर को इनेलो की रैली से माहौल पूरी तरह हमारे पक्ष में हो जाएगा। ओपी चौटाला ने कहा कि चुनावी परिणाम से सरकार पूरी तरीके से डगमगा जाएगी। इस बार इनेलो अपने पुराने इतिहास को दोहराएगी।

6 साल में एक बार चाय पीने नहीं आए सीएम : दीपेंद्र
राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कुशासन के खिलाफ बरोदा की जनता जनादेश देने जा रही है। भाजपा ने 6 सालों में कुछ काम नहीं करवाए। मुख्यमंत्री 6 साल में एक बार चाय पीने भी नहीं आए और उपचुनाव में अंतिम समय चुनाव के लिए पहुंचे हैं। चुनाव नतीजे आते ही सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी।

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