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गुड़िया हत्याकांड: शिमला के IG जहूर जैदी सहित आठ पुलिसकर्मी दोषी करार, चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट का फैसला

Sat, 18 Jan 2025 05:18 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। मामले में एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया, जिनमें नेपाली युवक सूरज भी शामिल था। कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई।
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शिमला के आईजी जहूर जैदी - फोटो : फाइल
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विस्तार
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वर्ष 2017 में शिमला जिले के कोटखाई में गुड़िया दुष्कर्म व हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में हत्या के मामले में सीबीआई कोर्ट ने आठ आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोषी करार देने के बाद पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के आईपीएस आईजी जहूद हैदर जैदी, दीप चंद शर्मा, मोहन लाल, सूरत सिंह, मनोज जोशी, राजिंद्री सिंह, रफी मोहम्मद व रंजीत सतेता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। जबकि गवाहों के बयान व सुबूतों के अभाव में नामजद हिमाचल के एसपी डंडूब वांगियाल नेगी को बरी कर दिया गया है। सभी दोषी आरोपियों को 27 जनवरी को सजा जाएगी।

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गौरतलब है कि शिमला जिले के कोटखाई में 4 जुलाई, 2017 को लापता हुई 16 वर्षीय छात्रा का शव कोटखाई के तांदी के जंगल में निर्वस्त्र हालत में मिला था। मामले जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी सैयद जहूर हैदर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी जिसने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। मौत का यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया और जांच में खुलासा हुआ कि सूरज की मौत पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई थी। इसी आधार पर सीबीआई ने आईजी जैदी सहित मामले से जुड़े नौ अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या की धारा 302, सुबूत खुर्द-बुर्द करने की धारा 201 सहित अन्य कई संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। वर्ष 2017 में इस मामले को शिमला जिला अदालत से चंडीगढ़ सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था। 

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इस मामले में 13 दिसंबर को शिकायतकर्ता सीबीआई पक्ष, 16 को आरोपी आईपीएस जहूद हैदर जैदी, 17 को आरोपी दीप चंद शर्मा, मोहन लाल, 18 दिसंबर को आरोपी सूरत सिंह, 19 दिसंबर काे आरोपी मनोज जोशी व डंडूब वांगियाल नेगी सहित 20 दिसंबर आरोपी राजिंद्र सिंह, रफी मोहम्मद व रंजीत सतेता की गवाही व आखिरी बहस हुई थी। कोर्ट ने आरोपी संख्या 5 और 7 ने अलग-अलग बयान देकर अपने बचाव साक्ष्यों को बंद कर दिया था।

आरोपी 8 के अधिवक्ता ने भी अलग-अलग बयान देकर अभियुक्तों की ओर से बचाव साक्ष्य को बंद कर दिया जबकि आरोपी 9 ने अलग-अलग दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बयान देकर साक्ष्य को बंद कर दिया था। आरोपी नंबर-तीन द्वारा बार-बार कोर्ट में आवेदन दायर करने के इस मामले में देरी हुई। इस मामले में एसएचओ कोटखाई थाने के तीन बयान बयान दर्ज हुए।

बीती 16 जनवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने तीन नंबर आरोपी के बयान व साक्ष्य भी बंद कर दिए थे और ऑर्डर्र के लिए पहले ही 18 जनवरी तारीख फिक्स कर दी थी। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान मामले में नामजद सारे आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट ने सभी पक्षों द्वारा दी गई दलीलों, गवाहों के बयान व सुबूतों के आधार पर आईपीएस जैदी व डीएसपी सहित आठ आरोपियों को दोषी करार दे दिया जबकि एसपी नेगी को बरी कर दिया।
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