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ईद स्पेशल: बकरा मंडी में शाहरुख-सलमान नहीं, 'सुल्तान' की डिमांड

Tue, 13 Sep 2016 09:37 AM IST
प्रवीण शर्मा/अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा)
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मेवात की बकरा मार्केट - फोटो : फाइल फोटो
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ईद के मौके पर बकरा मंडी में इस बार शाहरूख और सलमान नहीं बल्कि सुल्तान की डिमांड है, वो भी मेवात के सुल्तानों की। इसी कारण मेवात एवं इसके आसपास के क्षेत्र के लोग अपने बकरों को सुल्तान का नाम दे रहे हैं।
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उनकी परवरिश भी नाम के अनुरूप की गई है ताकि उन्हें मंडी में अपने बकरों के अच्छे दाम मिल सकें। बकरों की खरीद-फरोख्त के लिए मुंबई की मंडी विश्वविख्यात है। देशभर से पशुपालकों के साथ मेवात एवं इसके आसपास के पशुपालक भी बकरीद के समय अपने बकरों को यहां बेचने के लिए आते हैं।

अच्छे दाम मिलने से क्षेत्र के बहुत से लोगों ने इसे व्यवसाय के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। साल भर तक बकरे पालने के बाद इन्हें बकरीद के समय मुंबई की मंडी में भेज दिया जाता है। यहां अरब देशों से आने वाले लोग मोटे पैसे देकर इन्हें ले जाते हैं।
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बकरीद पर बकरों की कीमत में इजाफा

मेवात की बकरा मार्केट - फोटो : फाइल फोटो
पशुपालकों की मानें तो आमतौर पर एक बकरा पांच से दस हजार रुपये में बिक जाता है। लेकिन बकरीद के समय इनकी कीमत में एकदम इजाफा हो जाता है। बकरे की कीमत इनके वजन और कद काठी से आंकी जाती है। अगर बकरा ठीक-ठाक हो तो उसकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच जाती है। बकरीद के समय मेवात क्षेत्र से प्रतिदिन आठ से दस ट्रक प्रतिदिन मुंबई के लिए रवाना होते हैं।

मुनाफे ने बनाया व्यवसाय
मेवात के समीपवर्ती नौगांवा के रब्बाका गांव निवासी जयसिंह, तैयब आदि ने बताया कि बकरों से भरा एक ट्रक मुंबई तक ले जाने में 50 से 60 हजार तक का खर्चा आता है। एक ट्रक में करीब 50 बकरे आ जाते हैं। पालन-पोषण से लेकर मुंबई की मंडी तक ले जाने में एक बकरे पर कुल पांच से छह हजार रुपये तक का खर्चा आता है। इसके बाद भी अच्छी मुंबई में बकरे के अच्छे दाम मिल जाते हैं। इसी कारण लोग इसे व्यवसाय के रूप में करने लगे हैं।
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इन जगहों पर होते हैं तैयार

मेवात की बकरा मार्केट - फोटो : फाइल फोटो
मेवात के समीपवर्ती अलावलपुर, रब्बाका, मूनपुर, रसगण, शेरपुर, खैरथला, सुन्हैड़ा, करथल, घनौता, बुर्जा आदि जगह लोग बकरों को अधिक संख्या में पालते हैं।

करीब एक साल का लगता है समय
बकरों में मुख्य रूप से दो तरह की नस्ल देखने को मिलती है। इनमें देसी नस्ल और तोतापुरी नस्ल है। कुर्बानी के लिए 14 माह का बकरा उपयुक्त माना जाता है। बकरा पालने वाले इसे दो से तीन माह का होने पर खरीद लाते हैं।

फिर इसे बकरीद के लिए तैयार किया जाता है। कद-काठी बढ़ाने के लिए इन्हें उच्च कोटी का आहार दिया जाता है। अलग-अलग नाम रखे जाते हैं। सुल्तान फिल्म के सुपरहिट होने के बाद इस समय बकरों में सुल्तान नाम अधिक चलन में है।
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