सभी खाद्य वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि का असर चावल पर नहीं पड़ा है। व्यापारी इसके पीछे का कारण चावल के निर्यात पर लगाई गई रोक को बता रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि चावल बाहर नहीं जा पाने के कारण महंगाई से दूर है। यह अभी भी 40 रुपये से लेकर 100 रुपये किलो तक बिक रहा है।
एक माह में कितने बढ़े दाम
- वस्तु जनवरी(थोक मूल्य) फरवरी(थोक मूल्य) फुटकर मूल्य
- रिफाइंड 65 रुपये 85 रुपये 95-100 रुपये
- सरसों का तेल 90 रुपये 100 रुपये 110-115 रुपये
- दाल 60 रुपये 85 रुपये 100-115 रुपये
- चीनी 34 रुपये 36 रुपये 38-40 रुपये
नोट: खाद्य वस्तुओं के मूल्य सेक्टर 26 की ग्रेन मार्केट के मुताबिक
महंगाई कोई नई बात नहीं
महंगाई कोई नहीं बात नहीं है। सालों से मध्यम वर्ग के लोगों को इसका दंश को झेलना पड़ रहा है। जब तक यहां की सरकारों के द्वारा महंगाई को लेकर सुनियोजित तरीके से रणनीति नहीं बनाई जाएगी तब तक लोगों को इससे राहत नहीं मिल पाएगी। -कुसुम, गृहणी
लोगों को सड़कों पर उतरना होगा
महंगाई को लेकर नेता और अफसर तब तक कुछ नहीं करेंगे जब तक लोग इसके विरोध में सड़कों पर नहीं उतरेंगे। सरकार चाहे किसी भी दल की हो आमजन को महंगाई से राहत देने के लिए कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। अब पब्लिक को इसके खिलाफ सड़कों पर उतरना होगा। सुमन गुप्ता, धनास
नेता नहीं सिर्फ पब्लिक होती है परेशान
महंगाई की इस मार से नेता नहीं पब्लिक परेशान होती है। प्याज से लेकर किराना तक सब महंगा हो गया है। मध्यम वर्ग किचन की बढ़ती इस महंगाई को लेकर सबसे ज्यादा प्रभावित है। यह गंभीर समस्या है, जल्द ही कोई ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है। पूजा बख्शी, समाज सेविका व गृहणी