चंडीगढ़ में लंबे समय से अटके एजुकेशन सिटी प्रोजेक्ट को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। यूटी प्रशासन के निर्देश पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यूजीसी के साथ बैठक की है और चार मॉडल पर काम जारी है। प्रशासन अब आईआईटी-आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से दोबारा बातचीत करने के साथ-साथ विदेशी यूनिवर्सिटी कैंपस को भी आमंत्रित करने की योजना बना रहा है।
सारंगपुर में करीब 150 एकड़ की जमीन पर यूटी प्रशासन ने वर्ष 2006 में एजुकेशन सिटी बनाने की योजना बनाई थी। काफी कोशिशों के बाद अब तक वहां सिर्फ एक नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (निम्स) की स्थापित हो पाया है। लेकिन अभी भी काफी जमीन खाली है। पूर्व सलाहकार धर्मपाल ने एजु सिटी पर दोबारा काम शुरू किया था।
कुछ महीने पहले चंडीगढ़ पहुंचे केंद्रीय गृह सचिव ने भी इस संबंध में निर्देश दिए थे। हाल ही में शिक्षा विभाग ने एजु सिटी प्रोजेक्ट को पटरी पर लाने का काम शुरू किया है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के साथ एक बैठक की है। इसमें मुख्य रूप से चार मॉडल पर चर्चा हुई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में 'शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण' का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन इस पर गंभीरता से कार्य कर रहा है। इसके अनुसार विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस को आमंत्रित किया जाएगा। देश में ऐसी पहली यूनिवर्सिटी गुरुग्राम में खुलने जा रही है। दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में शुमार साउथम्पटन विश्वविद्यालय अपना कैंपस जुलाई 2025 से शुरू कर रहा है। चंडीगढ़ में भी इसी तर्ज पर विदेशी यूनिवर्सिटी को आमंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा, किसी यूनिवर्सिटी व कॉलेज के एक्सटेंशन, एक्सचेंज प्रोग्राम पर भी काम किया जा रहा है।
आईआईटी रोपड़, आईआईएम अमृतसर ने भी जताई है इच्छा
एजु सिटी में अपना कैंपस खोलने के लिए आईआईटी रोपड़ और आईआईएम अमृतसर ने भी रुचि दिखाई है। आईआईटी रोपड़ को 8 एकड़ जमीन देने के लिए वर्ष 2023 में प्रशासन ने मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई।
प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित परियोजना में कुल उपलब्ध भूमि लगभग 32 एकड़ है, जिसे छह भूखंडों में विभाजित किया गया है। इसमें 6 एकड़ के तीन भूखंड, 2.5 एकड़ का एक भूखंड, 3 एकड़ का एक भूखंड और 9 एकड़ का एक भूखंड शामिल है। आईआईटी रोपड़ को एडु सिटी में अपने परिसर के लिए लगभग 8 एकड़ जमीन आवंटित करने की योजना बनाई गई थी लेकिन उन्हें कीमत ज्यादा लग रही थी। इस वजह से बात आगे नहीं बढ़ पाई लेकिन जल्द ही उनसे भी संपर्क किया जाएगा।
अगले हफ्ते इंजीनियरिंग-आर्किटेक्ट विभाग के साथ बैठक
एजु सिटी 150 एकड़ में बसना था। इसमें 75 एकड़ निजी संस्थानों के लिए आरक्षित किया गया है। बाकी 75 एकड़ जमीन डिजाइन संस्थान और अन्य व्यावसायिक कॉलेजों के लिए आरक्षित की गई है। शुरू में कुल नौ संस्थान शॉर्टलिस्ट किए गए थे लेकिन केवल तीन ने ही प्रशासन के साथ एमओयू साइन किया। इसमें नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (निम्स), चंडीगढ़ स्थित चितकारा एजुकेशन ट्रस्ट और इंडियन एक्सप्रेस न्यूजपेपर (मुंबई) लिमिटेड थे। हालांकि इसमें से भी दो ने सरेंडर कर दिया और केवल एक संस्थान निम्स ने प्लॉट नंबर-5 पर अपना कैंपस स्थापित किया है। विभाग के पास निम्स के दोनों तरफ जमीन है। वहां की पूरी स्थिति को समझने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अगले हफ्ते इंजीनियरिंग, आर्किटेक्ट और एस्टेट विभाग के साथ एक बैठक रखी है।