पीयू फिलहाल आउट सोर्सिंग के जरिये भर्ती होने वाले कर्मचारियों से ही काम चलाएगा। लेकिन मार्च, 2020 से पहले मैनपावर ऑडिट करवाकर उसके बाद स्थायी नियुक्तियां करेगा। इस ऑडिट के जरिये पता लग जाएगा कि किस विभाग को कितने शिक्षक व कर्मचारियों की जरूरत है।
पीयू में कई साल से मैनपावर ऑडिट नहीं हुआ है। यूजीसी के मुताबिक यदि कोई पद तीन साल तक लगातार खाली रहता है तो वह स्वत: ही खत्म हो जाता है। ऐसे में जो पद खाली होंगे और उनका विकल्प विभागों ने नहीं चुना होगा तो वह खत्म हो गए। इनकी संख्या कितनी होगी, यह मैनपावर ऑडिट में आएगी। हालांकि कुछ विभागों व कार्यालयों में मानदेय पर भी लोग रखे हुए हैं। ऐसे पद स्वीकृत रहेंगे, वह खत्म नहीं होंगे। फिलहाल पीयू आउट सोर्सिंग से काम चल रहा है। यदि मैनपावर ऑडिट होगा तो पीयू का खर्च बचेगा। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में कांट्रेक्ट, डेली वेजेज, डीसी रेट पर काम कर रहे कर्मचारियों की संख्या अधिक है। यदि ऑडिट होगा तो इन कर्मचारियों की संख्या कम होगी। ऐसे में पीयू पर भार कम पड़ेगा। हर साल आउट सोर्सिंग के लिए मिलने वाले 36 करोड़ का उपयोग पीयू कहीं दूसरे कार्यों में कर सकेगा। सूत्रों का कहना है कि पीयू के कुछ लोग मैनपावर ऑडिट के पक्षधर नहीं हैं, इसलिए इतने समय से यह नहीं करवाया जा सका, लेकिन अब पीयू प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। यह कार्य मार्च तक हो जाएगा। उसके बाद नियुक्तियां निकालने की तैयारी शुरू हो जाएगी।
26 शिक्षकों के पद भरने को आवेदनों की स्क्रीनिंग शुरू
पीयू में 26 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन आवेदन आने के बाद यह प्रक्रिया बाधित हो गई। सिंडिकेट ने इस प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया लेकिन रिकॉर्ड देखने के बाद नियुक्तियों को हरी झंडी मिल गई। फिलहाल इन पदों के सापेक्ष पीयू को 900 से अधिक आवेदन मिले हैं। इन आवेदनों की स्क्रीनिंग चल रही है। नए साल में पीयू को यह शिक्षक मिल जाएंगे।