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जानिए कैसे काम करती है ECMO, जिससे 'अम्मा' को दिया गया था लाइफ सपोर्ट

Tue, 06 Dec 2016 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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jayalalithaa - फोटो : File Photo
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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को कार्डियक अरेस्ट के बाद एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेंबरेन ऑक्सीजेनेशन (ईसीएमओ) में रखा गया था। शहर के कार्डियोलाजिस्ट ने बताया कि ईसीएमओ एक प्रकार का लाइफ सपोर्ट सिस्टम है। इसमें अतिगंभीर पेशेंट को रखा जाता है। इसका इस्तेमाल तभी किया जाता है, जब किसी मरीज का हार्ट और लंग्स (फेफड़े) काम करना बंद कर देता हैं। इस मशीन के माध्यम से रोगी के रक्त को आक्सीजेनेट और शुद्ध किया जाता है।
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 रोगी की खून की नस को मशीन के साथ जोड़ा जाता और खून मशीन में जाकर फिर से शरीर में जाता है। जब रक्त मशीन के अंदर जाता है तो उसे शुद्ध आक्सीजन मिलती है और रक्त को शुद्ध करता है, जो हार्ट और लंग्स को रिकवर करने में मदद करता है। पीजीआई और जीएमसीएच-32 में तो फिलहाल यह सुविधा नहीं है। एम्स में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यूएस में काफी तादात में इसका इस्तेमाल होता है।
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हार्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट में अंतर

- फोटो : File Photo
डायलिसिस से अलग है
एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेंबरेन आक्सीजेनेशन (ईसीएमओ) व डायलिसिस में अंतर है। डायलिसिस में खून को निकालकर उसके हानिकारक तत्व बाहर निकाले जाते हैं और रक्त को फिर से शरीर में डाला जाता है। जबकि ईसीएमओ में रक्त को आक्सीजेनेट और शुद्ध किया जाता है।

हार्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट में अंतर
कई लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही मानते हैं, जबकि दोनों में काफी अंतर है। जब हार्ट को जाने वाली रक्त की सप्लाई में रुकावट पैदा होती है तो हार्ट अटैक पड़ता है। इस दौरान दूसरे हिस्सों में दिल ब्लड की सप्लाई करता रहता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हार्ट काम करना बंद कर देता है। इससे इंसान बेहोशी की हालत में चला जाता है। सांस की सप्लाई रुक जाती है और मृत्यु हो जाती है। यदि लाइफ सपोर्ट मिलता है तो इंसान को बचाया भी जा सकता है। 
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