चंडीगढ़। सोसाइटी ऑफ ट्रांसेसोफिजियल ईकोकार्डियोग्राफी और पीजीआई एनेस्थीसिया विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। कार्यशाला में एम्स दिल्ली के कार्डियक सर्जिकल इन्टेंसिव केयर के विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश ने हृदय प्रत्यारोपण की सफलता की तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पोस्ट कार्डियक ट्रांसप्लांट मरीजों पर ईको कार्डियोग्राफी स्ट्रेन इमेजिन की मदद से कार्डियक ट्रांसप्लांट रिजेक्शन का पता लगाया जा सकता है। यह तकनीक हृदय प्रत्यारोपण की सफलता दर को बढ़ाने में बेहद कारगर है।
डॉ. सर्वेश ने बताया कि सामान्य तौर पर हृदय प्रत्यारोपण के बाद मरीज को कई तरह की दवाएं दी जाती हैं ताकि सर्जरी के बाद कोई रिएक्शन न हो लेकिन सर्जरी के बाद समय रहते कमियों के बारे में पता नहीं चलने से प्रत्यारोपण असफल हो जाता है। ईको कार्डियोग्राफी स्ट्रेन इमेजिन की मदद से आईसीयू में भर्ती मरीज के वैल्यु (सर्जरी के बाद के पैरामीटर जिसके आधार पर सफलता दर का आकलन किया जाता है ) की गणना की जाती है। जिससे समय रहते उन कारणों का पता चलता हैए जो प्रत्यारोपण रिजेक्ट होने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इस तकनीक की मदद से समय रहते कमियों की जानकारी होने से विशेषज्ञ बचाव के उपाय कर सर्जरी को सफल कर सकता है।
कार्यशाला में इनका योगदान रहा सराहनीय
एडवांस कार्डियक सेंटर में आयोजित कार्यशाला के आयोजक अध्यक्ष प्रो. भूपेश, सचिव डॉ. कुलभूषण और सदस्यों प्रो. बनश्री, डॉ. कुलभूषण, डॉ. सुंदर, डॉ. इंद्रनील, डॉ. राजराजन, डॉ. केपी गौरव और डॉ. इरा धवन का विशेष सहयोग रहा।