चंडीगढ़। सेक्टर-17 स्थित खादी इंडिया स्टोर में गांधी जयंती के उपलक्ष्य पर सेल लगाई गई थी। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू भी खरीदारी करने के लिए पहुंचे। अमूमन स्टोर के बाहर कोई नहीं होता लेकिन बुधवार को 15 महिलाएं सूत कातती नजर आईं। उन्होंने बताया कि इस काम में मेहनत बहुत है लेकिन पैसा कम। हफ्ते में दो किलो सूत कात पाते हैं और रुपये सिर्फ 180 मिलते हैं लेकिन यहां एक दिन के लिए आने के 500 रुपये मिलते हैं। स्टोर के सामने सूत कात रही महिलाओं ने बताया कि उन्हें एक किलो सूत कातने के केवल 90 रुपये मिलते हैं, और वह एक हफ्ते में करीब 2 किलो सूत ही कात पाती हैं। क्योंकि के घर के काम के साथ इस काम को समय देना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके बाद भी वह समय निकाल कर घर पर सूत कातती हैं परंतु उनकी मेहनत का सही मोल नहीं मिल पाता है। हालांकि, उनकी आर्थिक स्थिति पर सवाल उठता है, जब दिखावे के लिए उन्हें अच्छी दिहाड़ी मिल सकती है तो रूटीन में काम करने के लिए क्यों अच्छे पैसे नहीं मिल सकते। खादी प्रेमियों का कहना है कि अगर सही तरीके से काम किया जाए तो खादी का व्यवसाय और भी आगे बढ़ सकता है। लोग खादी के साथ तभी जुड़ेंगे, तब ही खादी कातने वाली महिलाओं को सही मोल मिलेगा। महिलाओं ने बताया कि यह राशि अगर यह सूत कात के कमाए तो इन्हें लगभग 15 दिन तक काम करने के बाद मिलेगी।
अंग्रेज ने भी महिलाओं से सीखा सूत कातना : स्टोर के सामने बैठी सूत कातती हुई महिलाएं भारत की संस्कृति का प्रदर्शन कर रही थीं। इस नजारे ने वहां से गुजर रही तीन अंग्रेज महिलाओं को रुक कर सूत कातने की प्रक्रिया को जानने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद अंग्रेज महिलाओं ने सूत कात रही महिलाओं से सूत कातने की तरीके को जाना और खुद से सूत भी काता।
केंद्रीय मंत्री ने महिलाओं से की बातचीत : सेक्टर-17 स्थित खादी इंडिया स्टोर पहुंच कर मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सबसे पहले बाहर बैठी सूत कात रही महिलाओं से बातचीत कर उनके बारे पूछा। स्टोर के अंदर जाने से पहले मंत्री ने गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हुए, ज्योत जलाई। इसके बाद वह अपने लिए खरीदारी करने के लिए स्टोर में चले गए। जहां उन्होंने खुद के लिए एक सिल्क का कुर्ता, कुर्ते के लिए बास्केट का कपड़ा और अपनी पार्टी की कार्यकर्ता के लिए एक शॉल खरीदा।