अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान जजपा विधायक रामकुमार गौतम और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला एक बार फिर मंगलवार को विधानसभा में आमने-सामने हो गए। जैसे ही गौतम ने बजट के बाद डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को निशाने पर लिया तो डिप्टी सीएम ने इस पर आपत्ति जताई और डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा से पूछा कि किसके कहने पर आपने गौतम को बुलवाया है, जबकि जजपा ने तो इनका नाम ही नहीं दिया। दुष्यंत ने कहा कि, मुझे लगता है कि आप अपनी मर्जी से ऐसा कर रहे हैं और सदन की गरिमा बनाए रखने के बजाय आप मनोरंजन के लिए खुद ही विधायक को बुलवा रहे हैं। ये ठीक नहीं है, किसने आपको पर्ची दी, उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जब रामकुमार गौतम को बोलने के लिए अधिकृत नहीं किया गया तो उन्हें किसी अनुमति से बोलने का मौका दिया गया है। यह वाक्या पहली बार नहीं है, बल्कि कई बार ऐसा हो चुका है। चौटाला ने सवाल उठाया कि बिना पार्टी अनुमति के बोलने का मौका देने और पर्ची पर नाम लिखने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। सदन की गरिमा है, इसे इंटेरनेमेंट का जरिया न बनाया जाए।
फिर झलका गौतम का दर्द, निकाल दो मुझे पार्टी से
नारनौंद से जजपा विधायक रामकुमार गौतम का मंत्री न बनाए जाने का दर्द छलक ही गया। गौतम बोले कहीं उन्हें पावर मिलने की आस थी, क्योंकि वे पावरफुल व्यक्ति काे हराकर आए थे। मगर जब मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें पता चला कि उनका नाम नहीं तो उन्होंने मंत्री बनने की कोई कोशिश नहीं की। दुष्यंत का नाम लिए बिना कहा कि उनसे कोई वास्ता नहीं रखा। तब मैंने बबली को कहा था, आप कोशिश कर लो। गौतम ने यह भी कहा कि पार्टी 5 बार नोटिस दे चुकी है कि क्यों न आपको पार्टी से निकाल दें। गौतम बोले, निकाल दो, मैं भी नहीं रहना चाहता ऐेसी पार्टी में।
उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर पलटवार करते हुए गौतम ने कहा कि वे चुने हुए विधायक हैं, उन्हें बोलने का पूरा हक है। वे केवल जजपा की टिकट से नहीं जीते हैं, बल्कि उनका खुद का भी वोट बैंक है।