पंजाब, उत्तर प्रदेश व राजस्थान से अगेती धान उत्पादक किसान धान लेकर पहुंच रहे हैं हरियाणा की मंडियों में
मार्केटिंग बोर्ड ने मंडियों से मांगी आवक की जानकारी
सरबती सहित अगेती धान की किस्मों की हो रही है कैथल, करनाल, फतेहाबाद की मंडियों में आवक
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के कई जिलों की अनाज मंडियों में इस समय दूसरे प्रदेशों से सरबती, नूरा, 1509 व अन्य अगेती किस्मों की आवक हो रही है। पंजाब, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के किसान का धान मंडियों में पहुंच रहा है। इसका कारण है हरियाणा में दूसरे प्रदेशों के मुकाबले अधिक दाम के साथ-साथ नकद भुगतान है। अगेती किस्मों के चावल का अधिकतर प्रयोग घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए होता है। इसी कारण राइस मिलर्स व मध्यम व्यापारी इसकी खरीद करते हैं।
हरियाणा में करनाल, कैथल व फतेहाबाद के टोहाना की मंडियों में सरबती, नूरा व पूसा 1509 धान की आवक हो रही है। सबसे अधिक करनाल जिले की मंडियों में अगेती धान पहुंच रहा है। यहां उत्तर प्रदेश के किसान धान लेकर आ रहे हैं। ये 1509 व नूरी किस्म की धान ला रहे हैं। उत्तर प्रदेश के शामली के गांव हर्षाणा निवासी महेश मलिक ने कहा कि उनके यहां इस धान के खरीदार कम हैं, जो गंगोह क्षेत्र में धान खरीदते हैं, वहां कीमत पूरी नहीं मिलती। यहां धान लाने पर 2 से 300 रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिलता है। इस बार यहां 3500 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला है। इसी प्रकार से कैथल की मंडी में साथ लगते पंजाब के किसान 1509 व सरबती जैसी किस्में लेकर पहुंच रहे हैं। यहां आढ़ती ने बताया कि कैथल के साथ लगते पंजाब क्षेत्र में ज्यादा राइस मिले नहीं हैं, ऐसे में कई गांवों के किसान धान लेकर यहां आते हैं। उधर, टोहाना अनाज मंडी में पंजाब व राजस्थान क्षेत्र से धान पहुंच रहा है। मार्केटिंग बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि बोर्ड ने मंडियों में एक अगस्त से आ रही धान की आवक की जानकारी मुख्यालय भेजने के लिए पत्र लिखा है।
तो किसान और ज्यादा धान लेकर आ सकते हैं
करनाल अनाज मंडी के प्रधान रजनीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश से काफी संख्या में किसान धान लेकर करनाल आते हैं। इस समय करीब 15,000 क्विंटल धान करनाल मंडी में आवक हो रही है। यदि सरकार मार्केट कमेटी फीस में कुछ कमी कर दे तो किसान और ज्यादा धान लेकर आ सकते हैं। इससे प्रदेश को राजस्व ज्यादा प्राप्त होगा। यहां यूपी के मुकाबले ज्यादा कीमत व तुरंत नकद भुगतान के कारण किसान धान लेकर पहुंच रहे हैं।
उधर, चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि अगेती किस्मों की धान की खरीद मध्यम वर्ग के व्यापारी घरेलू जरूरतों के लिए करते हैं, जिन मिलर्स की मिलें इस समय बंद हैं, वे ज्यादा खरीद करते हैं। क्योंकि निर्यातकों व बड़े मिलर्स की मिलों में इस समय व्यापक स्तर पर मिलिंग होती है।