पंजाब की नस्ल को नशे की गर्त में धकेलने में बरनाला भी पीछे नहीं हैं। यहां की सांसी बस्ती को नशे की मंडी के नाम से जाना जाता है। खास बात यह है कि यहां बड़ी संख्या में महिलाएं नशा बेचती हैं और इस बस्ती में रहने वाली करीब 95 प्रतिशत महिलाओं पर नशे बेचने के मामले दर्ज हैं।
सांसी बिरादरी के यह लोग शुरू में शराब बेचते थे लेकिन शराब के ठेकों की नीलामी होने के बाद इन लोगों ने शराब को छोड़कर भुक्की चूरा पोस्त बेचने का काम शुरू कर दिया। अब इस बस्ती में स्मैक तक मिलने लगी है। 100 रुपये तक स्मैक के नशे जैसी पुड़िया यहां आम मिल जाती है।
इस बस्ती में मेडिकल नशा भी बिकता है। पहले इस बस्ती में से सिर्फ शराब, भुक्की, अफीम और चूरा पोस्त मिलता था लेकिन अब यह लोग बड़े स्तर पर मेडिकल नशा बेचने लगे हैं।
गांव की महिलाएं भी तस्करी में शामिल
गांव की महिलाओं समेत करीब 250 व्यक्ति तस्करी के आरोप में अलग-अलग जेलों में बंद हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक गांव दौलेवाला के भगौड़े बड़े नशा कारोबारी स्वर्ण सिंह उर्फ सोना के खिलाफ मोगा, लुधियाना, फिरोजपुर जिलों में भुक्की तस्करी के 12 केस दर्ज हैं।
इसके अलावा गिंदर सिंह पर 7, निशान सिंह पर 5, बख्शीश सिंह पर 3, छिंदर सिंह पर 3, सुखदेव सिंह सेबू पर 5, रेशम सिंह, गांव महेसरी पर 6, हरजीत सिंह उर्फ प्रभु गांव राउके कलां पर 5, बगीचा सिंह गांव कोट मुहम्मद खां पर 4, ग्यान सिंह, गांव मल्लके पर 7, गुरदेव सिंह उर्फ देबू गांव गलोटी पर नशा तस्करी के सात केस दर्ज हैं। सभी तस्कर भगोड़े हैं। गांव की महिला सरपंच के पति पर भी तस्करी के कई केस दर्ज हैं।
अलसुबह ही पहुंच जाते हैं नशेड़ी
इस बस्ती में रहने वाली महिलाएं हर किसी को घेरकर नशा लेने का ऑफर देती हैं। नशे की लत में लगे युवा तो सुबह पांच बजे ही इस बस्ती में पहुंच जाते हैं। इन लोगों ने मेडिकल नशे की एक किट बनाई होती है, जिसमें नशे के कैप्सूल, गोलियां आदि सामान होता है। इस किट को वह 500 से 900 रुपये तक बेचती हैं।
करीब चार-पांच साल पहले तत्कालीन डीएसपी दविंदर सिंह और डीएसपी स्वर्ण सिंह खन्ना भेष बदल कर इस बस्ती में से गुजरे तो महिलाओं ने उनको घेरकर नशा खरीदने का ऑफर दिया। इस पर तुरंत पुलिस बुलाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जिला पुलिस मुखी उपिंदरजीत सिंह घुंमन का कहना है कि इस बस्ती पर पुलिस की पैनी नजर है और इस बस्ती की महिलाओं और लोगों को कुछ दिन पहले एसएसपी दफतर के कम्युनिटी हॉल में बुलाकर चेतावनी भी दी जा चुकी है कि अगर कोई नशा बेचता पकड़ा गया तो सख्ती से निपटा जाएगा।
दौलेवाला के 80 प्रतिशत लोग करते हैं नशा तस्करी
पंजाब की जवानी को तबाही के किनारे ला खड़ा करने के लिए जिम्मेदार और मिनी चंडीगढ़ के नाम से पहचाने जाने वाले गांव दौलेवाला के 80 प्रतिशत लोग नशे का कारोबार करते हैं। औसतन हर घर के खिलाफ तस्करी का केस दर्ज है। जिले में पड़ते सतलुज दरिया क्षेत्र के पास के गांव दौलेवाला में राय सिख बिरादरी की संख्या ज्यादा है।
तस्करी के लिए बदनाम इस गांव का नेटवर्क राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश तक है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक पिछले आठ साल के दौरान इस गांव के लोगों के खिलाफ पंजाब में अलग-अलग थानों के अलावा राजस्थान, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में करीब 250 केस (भुक्की और सिंथेटिक ड्रग) और 150 शराब और अफीम के हैं। गांव में नशे की लत पूरी करने आए नशेड़ी नौजवान आम घूमते हैं।
पुलिस पहले सख्ती करती तो हालात बदतर न होते
तस्करी के कारण गांव के माथे पर कलंक लग गया है। इस गांव के लोग पाकिस्तान से उजड़ कर आए थे और बुरे आर्थिक हालातों ने लोगों को तस्करी की तरफ धकेला है। यह गांव पुलिस मुलाजिमों के लिए कमाई का साधन बना हुआ है।
अगर पुलिस पहले सख्ती करती तो आज गांव का यह हाल न होता। गांव को नशे के दलदल से निकालने के लिए किसी राजनीतिक पार्टी ने कोई प्रयास नहीं किया। पिछले कुछ अरसे के दौरान करीब 35 नौजवानों की नशे कारण मौत हो चुकी है। इस बुराई के लिए बेरोजगारी भी एक कारण है।
- रणजीत सिंह भोला, पूर्व सरपंच
फंड की कमी और सरकारी बेरुखी का शिकार नशा छुड़ाओ केंद्र
जिला रेडक्रास संस्था की तरफ से केंद्रीय सामाजिक और न्याय विभाग के सहयोग और राज्य के सामाजिक सुरक्षा और स्त्री और बाल विकास विभाग की निगरानी में मोगा-अमृतसर मार्ग स्थित गांव जनेर में चल रहा नशा छुड़ाओ और पुनर्वास केंद्र फंड की कमी और सरकारी बेरुखी का शिकार है।
गांव जनेर में जिला रेडक्रास संस्था की तरफ से चलाए जा रहे केंद्र को काफी अरसे से फंड नहीं मिला। इस केंद्र के लिए यहां के पूर्व कांग्रेस विधायक जुगराज सिंह गिल ने अपनी 5 एकड़ जमीन रेड क्रास को मुफ्त दी थी। लेकिन यह केंद्र फंड की कमी, सरकारी बेरुखी के कारण ज्यादा फायदेमंद नहीं हुआ।
केंद्र के इंचार्ज बलवंत सिंह ने बताया कि केंद्रीय सामाजिक और न्याय विभाग की तरफ से फंड नहीं दिए जा रहे। यहां पहले 15 लोगों के बैड का प्रबंध था लेकिन अब 50 बैड के लिए केस मंजूरी के लिए भेजा गया है।