रंजीत सिंह उर्फ चीता पर आरोप हैं कि वह आईएसआई के इशारों पर पंजाब में नशे की सप्लाई का काम करता रहा है। आरोपी इंडो-पाक बॉर्डर से पंजाब को खत्म करने के लिए लगातार नारको आतंक का प्रयास करने में जुटा रहा है। इंडो-पाक बॉर्डर से अवैध हथियारों और नशे की बड़ी खेप लाने के आरोपी रंजीत सिंह उर्फ राणा उर्फ चीता ने पुलिस इंटोरेगेशन में भी कई खुलासे किए हैं। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में कबूला कि वह अब तक पंजाब में नशे की चार बड़ी खेप ला चुका है।
हैरत की बात यह है कि आरोपी ने नशे की चारों खेप लाने के लिए केवल अटारी बॉर्डर का रास्ता ही चुना। सूत्रों के अनुसार, आरोपी हेरोइन के नशे की बड़ी खेप लेकर पंजाब में दाखिल हुआ था। आरोपी चीता ने उसे इंटेरोगेट कर रही पुलिस टीम के समक्ष यह भी खुलासा किया कि अटारी बॉर्डर से पंजाब की सीमा में वह किस प्रकार दाखिल हुआ और फिर पड़ाव दर पड़ाव कैसे आगे बढ़ा। सूत्रों के अनुसार, पुलिस जांच में पता लगा कि आरोपी कई मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर चुका है।
यहां तक कि वह किसी एक मोबाइल नंबर को अधिक समय तक इस्तेमाल नहीं करता था। पुलिस आरोपी चीता के सभी मोबाइल नंबरों का पता लगाकर उनकी कॉल डिटेल खंगालने में जुटी है, ताकि उसके द्वारा नशे की खेप के लिए तय किए पूरे रूट का मैप तैयार किया जा सके। साथ ही आरोपी के नेटवर्क से जुड़े उसके भाइयों के अलावा अन्यों का पता लगाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, पुलिस इस नेटवर्क से कनेक्ट कुछ अन्य चेहरों का पर्दाफाश भी जल्द कर सकती है।
डीजीपी पंजाब, दिनकर गुप्ता के दिशा निर्देशों पर पुलिसकर्मियों ने शनिवार की अल सुबह करीब साढ़े चार बजे हरियाणा के सिरसा के गांव बेगू में हरियाणा पुलिस की मदद से एक मकान में छापामारी कर आरोपी रंजीत उर्फ चीता और उसके भाई गगनदीप सिंह उर्फ भोला को गिरफ्तार किया था।
पांच मई से किया जाने लगा था चीता को सर्विलांस
पंजाब पुलिस को अमृतसर में पांच मई को गिरफ्तार किए आरोपी विक्रम उर्फ विक्की और उसके भाई मनिंदर सिंह उर्फ मनी से पूछताछ में रंजीत उर्फ चीता और उसके भाई के संबंध में जानकारी हासिल हुई थी। इसके बाद से ही पुलिस उन्हें सर्विलांस करने में जुटी थी। फिर पुलिस ने टेक्निकल मदद से आरोपियों की लोकेशन सिरसा में होने का पता लगाया। तुरंत बाद डीजीपी पंजाब, दिनकर गुप्ता ने डीजीपी हरियाणा, मनोज यादव से संपर्क किया। इसके बाद शुक्रवार की रात में ही पुलिस टीम को सिरसा के गांव बेगू के लिए रवाना कर दिया गया था। वहां से पुलिस टीम ने मजबूत रणनीति के आधार पर चीता और उसके भाई गगनदीप को दबोचने में कामयाबी हासिल की थी।
यह है आरोपियों की हिस्ट्री
आरोपी रंजीत से पूछताछ में पता लगा है कि वह वर्ष 2008, 2009 और वर्ष 2011 सहित समय-समय पर नशा तस्करी के मामलों में नामजद होता रहा है। आरोपी को पांच किलोग्राम हीरोइन तस्करी के आरोप में बारह वर्ष की सजा भी हो चुकी है। लेकिन वर्ष 2018 के मार्च महीने में आरोपी रंजीत सर्वोच्च न्यायालय से शक का फायदा लेकर छूट गया था। आरोपी रंजीत राणा उर्फ चीता समेत उसके पांच भाई हैं। इनमें से आरोपी गगनदीप सिंह उर्फ भोला सहित तीन नशा तस्करी के मामलों में नामजद हैं। अन्य दो आरोपी भाई बलविंदर सिंह उर्फ बिल्ला के खिलाफ वर्ष 1994, 2004 और वर्ष 2019 में तीन केस दर्ज हैं। जबकि आरोपी कुलदीप सिंह के खिलाफ वर्ष 2013, 2014 और वर्ष 2019 में नशा तस्करी के कई केस दर्ज हैं। यह सभी मामले एसटीएफ, एसएसओसी, डीआरआई अमृतसर में दर्ज हैं।