चंडीगढ़। एक लाख रुपये की रिश्वत मामले में आरोपी ड्रग कंट्रोल अधिकारी सुनील चौधरी ने वीरवार को जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने सुनील चौधरी को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। चौधरी लगभग पांच महीने से फरार चल रहा था। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला अदालत और उसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन दोनों अदालतों से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सुनील चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सरेंडर करने के लिए कहा था। इसके अगले दिन सुनील ने वीरवार सुबह लगभग ग्यारह बजे जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। सुनील चौधरी के खिलाफ विजिलेंस ने 27 सितंबर 2023 को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने बिचौलिए अशोक नरूला को रिश्वत की पहली किस्त 25 हजार रुपये लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। आरोपी अधिकारी को स्वास्थ्य विभाग निलंबित कर चुका है।
यह है मामलाधनास में ऑर्थोपेडिक सर्जिकल स्टोर के संचालक देव शरण शाह ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया था कि सुनील चौधरी और अशोक नरूला उसकी दुकान में आए और जांच करने लगे। शिकायतकर्ता से कहा गया कि उसकी दुकान में कई कमियां हैं। वह दुकान को सील कर देंगे। इस पर शिकायतकर्ता ने कहा कि वह कमियों को दूर कर लेगा। इसी बीच अशोक नरूला और सुनील चौधरी ने शिकायतकर्ता के पेपर पर दस्तखत ले लिए। अशोक ने कहा कि उसका काम एक लाख रुपये में हो जाएगा, दुकान भी सील नहीं होगी। शिकायतकर्ता ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई। इसके बाद नरूला ने 80 हजार रुपये देने की बात कही। शिकायतकर्ता के अनुसार रिश्वत की राशि न मिलने पर ड्रग कंट्रोलर ने विभाग से उसे नोटिस भिजवा दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता विजिलेंस के पास पहुंचा और शिकायत दी। विजिलेंस ने ट्रैप लगाकर अशोक नरूला को रंगे हाथ 25 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया और सुनील चौधरी व अशोक नरूला के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।