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आर्थिक संकट का सामना कर रहे ड्राइविंग स्कूल

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चंडीगढ़। कोरोना वायरस के चलते पूरा शहर बंद होने से मजदूर से लेकर बड़े-बड़े व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ड्राइविंग स्कूल चलाने वाले भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इसके संचालकों ने प्रशासन से राहत की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन सब के बारे में सोच रहा है, लेकिन उन्हें राहत देने के लिए अब तक विचार नहीं किया गया है। अब ऐसी स्थिति बन गई है कि घर का राशन तक खरीदने के लिए पैसा नहीं है। प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए।
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ओम साईं ड्राइविंग स्कूल के ट्रेनर सुरेश सैनी ने कहा कि शहर में ओला-उबर चलाने की अनुमति दे दी गई है, लेकिन उन्हें कोई छूट नहीं दी गई। ड्राइविंग स्कूल की गाड़ी में केवल दो ही लोग बैठते है। सीखने और सिखाने वाला। प्रशासन ने अभी तक कोई राहत नहीं दी है। उनके पास राशन तक के पैसे नहीं हैं।
सिंधु ड्राइविंग स्कूल के ट्रेनर जसवंत सिंह ने बताया कि प्रशासन ने होटल, रेस्टोरेंट खुलने की जानकारी तो दे दी है, लेकिन ड्राइविंग स्कूल खुलने की अभी तक कोई सूचना नहीं दी। इस स्कूल से उनका घर का गुजारा और गाड़ियों की किस्तें जाती हैं। 3 महीने से घर में रहने के बाद सब जमा पूंजी खत्म हो गई है। वह दिन-प्रतिदिन लोगों के कर्जदार होते जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द ही ड्राइविंग स्कूल खोलने की अपील की।
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फ्रेंड्स ड्राइविंग स्कूल के ट्रेनर विपिन शर्मा ने कहा कि उनके काम से किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं होगा क्योंकि उनकी गाड़ी में केवल दो ही लोग बैठते हैं। वह अपने वर्कर को 2 महीने से सैलरी दे रहे हैं, लेकिन अब उनके पास न तो गुजारे के लिए पैसे बचे हैं और न ही सैलरी देने के लिए। उन्होंने कहा कि ढाई महीने से घर रहने के बाद आय का कोई साधन नहीं बचा। इसलिए प्रशासन उनकी समस्याओं को समझे।
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