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नाटक ‘बलदे टिब्बे’ में दिखा जीवन के कई रंग

Sat, 14 Dec 2013 06:20 PM IST
अमर उजाला, पंचकूला
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सेक्टर-एक स्थित जैनेन्द्र स्कूल के आत्म ऑडिटोरियम में आयोजित चौथे टीएफटी फेस्टिवल के दौरान शुक्रवार को नाटक बलदे टिब्बे का मंचन किया गया।
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इस दौरान पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों की जर, जोरू और जमीन की मौलिक इच्छाओं को अभिनय के जरिए बखूबी प्रदर्शित किया गया।

अमेरिकी नाटक डिजायर अंडर द इल्म्स के पंजाबी रूपांतरण ‘बलदे टिब्बे’ में कलाकारों ने सशक्त अभिनय दिखाया। कलाकारों ने ऐसा अभिनय किया कि कभी दर्शक भावुक होते दिखे तो कभी चिंतन में डूबे हुए...।

सुदेश शर्मा द्वारा निर्देशित नाटक में एक महिला की व्यभिचारी जुनून का चित्रण किया। महिला ने धन के लोभ में एक बुजुर्ग से शादी कर ली, लेकिन बाद में उसके बेटे से ही प्यार कर बैठी।
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रतन एक बूढ़ा आदमी जो दो बार शादी करता है, उसके तीन बेटे हैं। बुढ़ापे में अपनी पत्नियों के मरने पर अपनी वासना एवं अहंकार की प्यास शांत करने के लिए अपने बेटे की उम्र की युवती प्रीतो से वह शादी कर लेता है।

नाटक में प्रीतो को एक गरीब घर की लड़की दर्शाया गया, जो रुपयों की कमी और समाज से बचने के लिए बुजुर्ग से ही शादी कर लेती है, लेकिन वह अपने पति के बेटे सरवन की ओर आकर्षित हो जाती है।

सरवन और प्रीतो एक दूसरे के करीब आते हैं और प्रीतो एक बच्चे को भी जन्म देती है, लेकिन रतन उस बच्चे को अपना बच्चा समझता है। इसलिए वह सारा धन उस बच्चे के नाम कर देता है।
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यह सुनकर सरवन को गुस्सा आता है, लेकिन प्रीतो उसे समझाती है कि यह बच्चा उसका है न कि रतन का। इसके बावजूद सरवन उसकी बातों पर विश्वास नहीं करता है।

इसलिए वह अपने प्यार को साबित करने के लिए उस बच्चे को मार देती है। नाटक प्रीतो और सरवन के एक दूसरे के प्रति प्यार के साथ समाप्त हुआ। नाटक के मंचन के दौरान टीएफटी के वीके सूद, शाम लाल बंसल और नाटक के निर्देशक सुदेश शर्मा भी मौजूद थे।
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