डॉ. स्वराज के नाटकों पर पीयू में 5 पीएचडी और 20 एमफिल
राष्ट्रीय साहित्य अकादमी की ओर से पंजाबी नाटककार डॉ.स्वराज वीर सिंह को पुरस्कार की घोषणा से पीयू के पंजाबी विभाग में खुशी की लहर है। डॉ. वीर के नाटकों पर पीयू में पांच पीएचडी और 20 एमफिल स्तर के शोध हुए हैं।
पेशे से आईपीएस अधिकारी डॉ.स्वराज की लेखनी हमेशा समाज के ज्वलंत मुद्दों को उठाती रही है। उनके दोस्त और पंजाब यूनिवर्सिटी के पंजाबी विभाग में प्रोफेसर सुखदेव सिंह सिरसा ने बताया कि स्वराज किसी भी विषय पर अपनी लेखनी चलाने से पहले उस पर काफी शोध करते हैं। यह उनकी लेखनी का ही जादू है कि उनके नाटक बड़े पैमाने पर शोध के लिए प्रेरित करते हैं। मूल रूप से पंजाब के गुरदासपुर जिले के रहने वाले डॉ.वीर सिंह का पंजाब यूनिवर्सिटी से भी विशेष लगाव है।
अमर उजाला से बातचीत में डॉ.सुखदेव सिंह ने डॉ.स्वराज से जुड़ी कई बातों को सांझा किया। सुखदेव सिंह ने बताया कि वीर सिंह आम आदमी से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को केंद्र में रखकर नाटक लिखते हैं। अमृतसर से एमडी करने के बाद उनका चयन आईपीएस के तौर पर हुआ। डॉ.स्वराज की दो किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने 7 नाटक लिखे हैं। जिनमें कृष्ण, धर्मगुरु, शायरी, मस्सया दी रात, अग्नि कुंड और कल्लर शामिल हैं। गरीब किसानों की समस्या पर आधारित अग्नि कुंड नाटक काफी लोकप्रिय रहा है। पंजाब साहित्य अकादमी लुधियाना के प्रेसिडेंट डॉ.सुखदेव सिंह का कहना है कि डॉ.स्वराज वीर सिंह को उनके बेहतर काम के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा के प्रेसिडेंट डॉ.सर्वजीत सिंह भी डॉ.स्वराज वीर सिंह के दोस्तों में शुमार हैं।