चंडीगढ़। गठिया लाइलाज बीमारी है, यह बीते जमाने की बात हो चुकी है। अब गठिया का इलाज पूरी तरह संभव है। जरूरत है समय रहते डॉक्टर के पास जाकर इलाज शुरू करवाने की। समय रहते सही इलाज शुरू हो जाने पर किसी को पता भी नहीं चलेगा कि आप कभी गठिया के मरीज थे। यह कहना है पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन के रह्युमेटालॉजिस्ट प्रो. अमन शर्मा का।
प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि गठिया कई प्रकार के होते हैं। इसमें से कुछ एक का बहुत कम समय के लिए तो कुछ का कुछ ज्यादा समय के लिए इलाज चलता है। यह सोचना कि यह बीमारी बुढ़ापे में होती है, पूरी तरह से गलत है क्योंकि कुछ एक गठिया 30 से 40 वर्ष की उम्र में युवाओं को अपनी चपेट में लेती है लेकिन उससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। युवा वर्ग को यह बात ठीक से समझनी होगी कि ऐसी बीमारियों से बचाव के लिए संतुलित जीवनचर्या और पोषक तत्व युक्त आहार का सेवन बेहद जरूरी है।
प्रो. अमन ने बताया कि पीजीआई ऐसा संस्थान है, जहां 1971 में देश के पहले सरकारी अस्पताल में रह्युमेटोलॉजी क्लीनिक स्थापित किया गया था। जहां आज भी प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को रह्युमेटोलॉजी क्लीनिक में मरीज देखे जा रहे हैं इसलिए गठिया संबंधी कोई भी लक्षण दिखने पर उसे नजरअंदाज न करें। गठिया ऐसा मर्ज है जो तत्काल जान नहीं लेता लेकिन उसे नजरअंदाज करने पर जान बचाना मुश्किल हो सकता है।
धूम्रपान से बचें
तंबाकू उत्पाद न केवल फेफड़ों और हृदय की बीमारियों के जोखिम को बढ़ाते हैं बल्कि इससे जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या होने का भी खतरा हो सकता है। धूम्रपान से निकलने वाला निकोटीन रीढ़ की हड्डी, ऊतकों और डिस्क में रक्त के प्रवाह को कम कर देता है। निकोटीन, कैल्शियम के अवशोषण को भी कम कर देता है। सिगरेट पीने से हड्डी के नए ऊतकों के बनने में रुकावट आती है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। धूम्रपान की आदत छोड़कर गठिया की समस्या के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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आप भी जान लें गठिया क्या है
गठिया यानी जोड़ों की बीमारी। यह एक ऑटोइम्यून डिसीज है। जब किसी व्यक्ति की इम्युनिटी अनियंत्रित होती है तो जोड़ों की झिल्ली के विरोध में काम करने लगती है। यह जोड़ों को, जोड़ों के आसपास के टिश्यू को और उनको जोड़ने वाले दूसरे टिश्यू (ऊतकों) को भी प्रभावित करता है। इसी को गठिया कहते हैं।
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200 से ज्यादा तरह का गठिया
गठिया के 200 से ज्यादा प्रकार हैं। कई गठिया कुछ बीमारी के बाद शरीर में दिखते हैं। जो अपने आप ठीक हो जाते हैं। कुछ गठिया की दवा एक से डेढ़ साल तक चलती है और कुछ की लंबे समय तक, लेकिन अधिकतर गठिया अब दवा से ठीक हो जाते हैं। बस सही वक्त पर डाक्टर के पास जाना चाहिए।
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लक्षणों पर करें गौर
जोड़ों में दर्द
जोड़ों में कठोरता, पैरों को हिलाने में भी कठिनाई महसूस होना
जोड़ों में सूजन और इसके आसपास लालिमा
चलने या सीढ़ियां चढ़ने तक में कठिनाई होना।
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इन बातों का ध्यान रखिए
रोजाना कम से कम 40-45 मिनट व्यायाम जरूर करें। प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर खाना खाएं।
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वैस्क्युलाइटिस में पीजीआई का परिणाम बेहतर
वैस्कुलाइटिस के इलाज और शोध में पीजीआई सिर्फ देश में ही नहीं विश्व के बेहतर केंद्रों में से एक माना जाता है। प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि वैस्क्युलाइटिस, रक्त वाहिकाओं में सूजन का कारण बनने वाली स्थितियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला एक सामान्य शब्द है। इसे एंजियाइटिस के रूप में भी जाना जाता है, यह रक्त वाहिकाओं को बड़ा, सिकुड़ा हुआ और फैला हुआ बनाता है, जिससे वे पूरी तरह से बंद हो जाते हैं और रक्त परिसंचरण में बाधा उत्पन्न करते हैं।