हरियाणा में एमबीबीएस बांड पालिसी को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि पालिसी गलत नहीं है, बल्कि सही है। इसमें बदलाव की संभावना नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एमबीबीएस के लिए विद्यार्थियों को कर्ज नहीं लेना होगा, मेडिकल कालेजों में जो फीस चल रह रही है, वही देनी होगी।
एमबीबीएस डिग्री के बाद सात साल तक नौकरी सरकार ही कर्ज लेगी और सरकार ही भरेगी। विद्यार्थियों से केवल बांड भरवाया जा रहा है, इसे सरकार कैश नहीं करेगी। अगर कभी जरूरत हुई तो इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा।
यहां पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री नेे कहा कि डॉक्टरी पेशा सेवा है और सरकार उसी को आगे बढ़ा रही है। जहां तक विरोध की बात है तो कुछ लोग इसे जानबूझकर समझना ही नहीं चाहते हैं। कुछ लोग विद्यार्थियों को उकसा रहे हैं। सरकारी मेडिकल कालेजों में तो 40 लाख रुपये का बांड भरवाया जा रहा है, प्राइवेट मेडिकल कालेज में तो एक करोड़ रुपये तक फीस है।
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई डाक्टर सात साल से पहले बांड तोड़कर जाता है तो उसे बांड की राशि भरनी होगी। सात साल की अवधि भी डाक्टरों की सहूलियत के लिए ही रखी गई है, ताकि वह लंबी अवधि में किस्त वाइज राशि वापस कर सकें। अगर अवधि कम की जाएगी तो किस्त अधिक हो जाएगी।
मनोहर लाल ने कहा कि जब एमबीबीएस के बाद जब डाक्टर सरकारी नौकरी नहीं करके प्राइवेट में जाता है तो उसका वेतन सरकारी से दो गुणा होता है, इसलिए जब वह डाक्टर बन जाता है तो उसे किस्त देने में कोई परेशानी नहीं होगी। डिग्री के बाद बांड की राशि जमा कराने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार हर जिले में मेडिकल कालेज खोलने पर काम कर रही है।
एक कॉलेज खोलने पर करोड़ों रुपये की लागत आती है। उनके लिए भी बजट चाहिए होता है। इसलिए प्रोफेसनल कोर्स को सेल्फ फाइनेंस की तरफ बढ़ाना होगा। जो इसमें राशि दे सकते हैं, उनको देनी चाहिए, ताकि अन्य जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सके।
अधिकारियों ने साधी चुप्पी, विद्यार्थियों को कौन समझाएगा पालिसी
हरियाणा में एमबीबीएस बॉंड पालिसी के मामले में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) ने हरियाणा सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। अभी तक विभाग के उच्च अधिकारी विद्यार्थियों को बांड पालिसी ही नहीं समझा पाए हैं। इधर, मेडिकल विद्यार्थियों का आंदोलन खत्म होने की बजाए लगातार बढ़ता जा रहा है। विभाग के अधिकारियों के रवैये के चलते अब खुद मुख्यमंत्री को मोर्चा संभालना पड़ रहा है।
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के निदेशक डा. आदित्य दहिया और एसीएस जी अनुपमा इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। रोहतक में आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि उच्च अधिकारियों ने बार भी विद्यार्थियों से बात तक नहीं की है, जबकि विद्यार्थी लगातार पत्र लिख रहे हैं। पीजीआई रोहतक के रिटायर्ड प्रोफेसर डा. रणबीर दहिया ने कहा कि विद्यार्थियों के साथ ऐसा रवैया ठीक नहीं है। बांड पालिसी में संशोधन किया जाए और अधिकारी विद्यार्थियों से बात करके आंदोलन को समाप्त कराएं।