बाजारों में दिखी रौनक, परंपरागत मिट्टी के दीए भी लोकप्रिय
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। दिवाली नजदीक आते ही शहर के बाजारों में रौनक लौट आई है। इस बार पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ-साथ मोमबत्ती और बैटरी से चलने वाले दीए ग्राहकों की पहली पसंद बन रहे हैं। 50 से 500 रुपये तक की कीमत में मिलने वाले ये दीए न सिर्फ सजावट बढ़ा रहे हैं, बल्कि देर तक रोशनी देने में भी सक्षम हैं।
सेक्टर-22 के दुकानदार जावेद ने बताया कि उनके पास 10 से ज्यादा तरह की डिजाइनर मोमबत्तियां उपलब्ध हैं। इनमें लड्डू, कमल के फूल और कलश आकार वाली मोमबत्तियों की मांग सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ग्राहकों की आवाजाही शुरू हुई है, जबकि 15 अक्टूबर के बाद भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। हर साल की तरह इस बार भी मांग बढ़ने पर रेट में इजाफा हो सकता है। दुकानदार उमेश के मुताबिक मोमबत्ती की खरीदारी दिवाली से तीन-चार दिन पहले चरम पर पहुंचती है। उनका कहना है कि इस बार कारोबार में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है।
मिट्टी के दीयों को दे रहे नया रूप
शहर के सामाजिक संगठन भी परंपरा को जीवित रखने में जुटे हैं। युवा स्तंभ संस्था की कार्यकर्ता रिया ने बताया कि उनका संगठन पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी के दीए तैयार कर रहा है। इन्हें आकर्षक रंगों से सजाकर शहर के विभिन्न बाजारों में बेचा जाएगा।
बैटरी वाले दीए भी हिट
बाजार में बैटरी संचालित दीयों की बिक्री भी तेजी पर है। इनकी कीमत 200 से 500 रुपये प्रति पैकेट तक है। वहीं, सेक्टर-17 के मेले में यह दीए 25 रुपये प्रति पीस के रेट पर मिल रहे हैं। यहां विभिन्न डिजाइन और रंग-बिरंगी लाइट वाले दीए लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं।