हरियाणा सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री फ्लोर पर मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा के निजी सचिव और एक निलंबित कर्मचारी के बीच धक्कामुक्की हो गई। सिज वजह से वीरवार दोपहर बाद फ्लोर पर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। कारण, घटना लगभग सवा दो बजे की है। निजी सचिव ने हरियाणा सामान्य सेवाएं शाखा-2 के निलंबित कर्मचारी अमनदीप को अपने कार्यालय से बाहर निकाल दिया।
साथ ही अमनदीप का मोबाइल लेकर सीएम सिक्योरिटी में शामिल कर्मचारियों को सौंपा और उस पर वीडियो बनाने के आरोप लगाए। निलंबित कर्मी का फोन जब्त कर लिया गया। निजी सचिव का पारा चढ़ा देखकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय के बाहर मौजूद स्टाफ और सुरक्षा कर्मी भी उनकी तरफ भागे। इससे पहले कि स्थिति बिगड़ती सुरक्षा कर्मी बिना देरी किए अमनदीप को सीएम फ्लोर से बाहर ले गए।
लिफ्ट के पास ले जाकर उससे पूछताछ की और पूरा मामला जाना। सीएम सिक्योरिटी और अन्य कर्मचारियों ने उसे शांत कराया। अमनदीप मोबाइल वापस मांगता रहा, जिसे नहीं लौटाया गया। निजी सचिव ने बताया कि अमनदीप को लिपिक के आने पर रिसीविंग दे दी गई, जैसे ही उसे कॉपी वापस करने लगे तो देखा कि वह कार्यालय में मौजूद स्टाफ की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। इसलिए उसे बाहर भेज दिया और मोबाइल लेकर सुरक्षा कर्मियों को सौंपा।
रिसीविंग मांगने पर गले से पकड़कर बाहर निकाला
अमनदीप ने बताया कि निलंबन के आरोपों का जवाब मुख्य सचिव को देने के लिए उनके कार्यालय पहुंचा था। उसने मुख्य सचिव के निजी स्टाफ कार्यालय में जवाब की प्रति सौंपने के साथ ही एक कॉपी पर रिसीविंग मांगी। जिस पर निजी सचिव भड़क गए। कार्यालय स्टाफ ने रिसीविंग तो दे दी, लेकिन निजी सचिव ने वीडियो बनाने का आरोप लगाते हुए मुझे गले से पकड़कर बाहर निकाल दिया। मेरा मोबाइल भी रख लिया गया। पहले से ही परेशान चल रहा था, पूरे वाकया से बहुत आहत हूं।
निलंबन के लिए लगाए गए आरोप निराधार
अमनदीप ने मुख्य सचिव को सौंपे जवाब में कहा है कि व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए निराधार आरोप लगाकर उन्हें निलंबित करवाया गया है। 26 फरवरी 2019 से 23 जुलाई 2019 तक सामान्य सेवाएं शाखा में कार्यरत रहा। उन पर अपनी सीट पर न बैठने, काम ईमानदारी से न करने और काम के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही कहा गया है जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री को पत्नी से पत्र लिखवाकर बहाल करने के लिए दबाव बनाया गया।
अमनदीप ने बताया कि सीट पर मौजूद फाइलें निपटाने के लिए कंप्यूटर की जरूरत थी, जिसके लिए विभाग के विशेष सचिव, अवर सचिव व शाखा इंचार्ज को अवगत कराया था। जिसके सुबूत जवाब के साथ संलग्न हैं। मंत्री को पत्र लिखकर दबाव नहीं बनाया गया, बल्कि बहाल करने की प्रार्थना की गई, चूंकि, निलंबन से पूरा परिवार परेशान चल रहा है। उन्होंने मुख्य सचिव से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित फैसला लेने की मांग की है।