चंडीगढ़। डड्डूमाजरा भू अधिग्रहण के मामले में एक और नया खुलासा हुआ है। भू अधिग्रहण विभाग ने अधिग्रहित की भूमि को जोड़ने वाले 6 मरले के रास्ते को बिना घोषणा के अधिग्रहित कर लिया। हैरानी की बात यह है कि रास्ते के मुआवजे की 20 लाख रुपये की रकम को भी न्यायालय में जमा कर दिया। हालांकि विभाग इस दावे को खारिज कर रहा है और नियमानुसार कार्रवाई की बात कह रहा है।
इस खुलासे के बाद डड्डूमाजरा के किसान और पिंड बचाओ कमेटी में आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि बिना घोषणा के रास्ते के अधिग्रहण की कार्रवाई भू अधिग्रहण अधिनियम (2013) की विभाग अनदेखी कर रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने किसानों के इस दावे को खारिज करते हुए नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
बता दें धनास के मुकाबले डड्माजरा के किसानों के कम मुआवजे को लेकर विरोध को देखते हुए बुधवार को यूटी ने पुलिस बल की मौजूदगी में पीआर 4 रोड के लिए डड्डूमाजरा की 97 कनाल 12 मरले की जमीन पर कब्जा ले लिया है। भूमि अधिग्रहण के दौरान एक बड़ी लापरवाही भू अधिग्रहण विभाग की सामने आई है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण अधिग्रहित भूमि को जोड़ने वाले छह मरले के रास्ते को बिना घोषणा के ही अधिग्रहण कार्रवाई में शामिल कर लिया।
खुलासे के बाद डड्डूमाजरा के किसान और पिंड बचाओ कमेटी में आक्रोश
कोट
छह मरले के रास्ते का अधिग्रहण किया गया है। इसकी राशि 20 लाख रुपये न्यायालय में जमा की गई है। बिना घोषणा के रास्ते को अधिग्रहित नहीं किया है। किसान इस मामले में राजनीति कर रहे हैं।
मक्खन लाल, कानूनगो, भू अधिग्रहण विभाग, चंडीगढ़
डड्डूमाजरा की भू अधिग्रहण कार्रवाई में विभाग सभी नियमों की अनदेखी कर रहा है। किसान इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह घोर लापरवाही है कि बिना घोषणा के ही रास्ते को अधिग्रहित कर लिया। -कुलजीत संधू, पूर्व सरपंच, धनास