फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिव्यांग बच्चे मौलिक शिक्षा से वंचित न रहें : हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
आवश्यक तंत्र विकसित करने के लिए उठाए कदमों का ब्योरा सौंपने के लिए सरकार को आखिरी मौका
विज्ञापन

-दिव्यांग बच्चे को लेकर दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए कदम उठाने का दिया था आदेश

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिव्यांग बच्चों के मौलिक शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने को लेकर लिए गए संज्ञान मामले में हरियाणा, पंजाब सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है। हाईकोर्ट इस मामले का निपटारा कर चुका है और अब तीनों को दिव्यांग बच्चों को लेकर आवश्यक तंत्र विकसित कर इस दिशा में उठाए गए कदमों का ब्यौरा न सौंपने पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन

याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी बच्चे की मां ने बताया था कि उसका 13 साल का बेटा डाउन सिंड्रोम का शिकार है। वह एक निजी स्कूल की स्पेशल विंग में 5 साल से पढ़ाई कर रहा था। दिव्यांग होने के बावजूद उसने स्पेशल ओलंपिक में रोलिंग स्केटिंग व स्विमिंग में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीते हैं। स्कूल ने बाकी बच्चे की सुरक्षा की दलील देते हुए याची को कहा था कि वह बच्चे को स्कूल से निकाल लें। इसके बाद जब याची ने शिकायत दी तो अधिकारियों की कमेटियों ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में बच्चे को जल्द गुस्सा आने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था कि 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार है। स्कूल का कार्य शिक्षा तो वहीं राज्य का काम इसके लिए संसाधन उपलब्ध करवाना है। चाहे कितनी भी मुश्किलें हों स्कूल व सरकार जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। कोर्ट ने कहा कि साधन व कानूनी प्रावधान मौजूद होने के बावजूद स्कूल प्रबंधन व सरकार और अधिकारियों में संवेदनहीनता की कमी के चलते दिव्यांग बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हाईकोर्ट ने बच्चे की पढ़ाई जारी रखने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें