चंडीगढ़ प्रशासन यूं तो दिव्यांग लोगों की पूरी मदद करने का भरोसा देता है, लेकिन असल में जब उनकी मदद करने की बारी आती है तो सभी मुंह मोड़ लेते हैं। शहर के आठ ऑटो प्रीपेड बूथ पर 11 दिव्यांग कर्मचारी पूरे महीने ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर काम करते हैं। लेकिन उनकी गिनती किसी भी विभाग में नहीं होती।
इनका कहना है कि वह 12 वर्षों से एक ही सैलरी पर काम कर रहे हैं। शुक्रवार को सभी 11 कर्मचारी एसएसपी ट्रैफिक मनीष चौधरी से अपनी तनख्वाह बढ़ाने और विभाग में शामिल करने के लिए मिले। मगर यहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
ऑटो प्रीपेड बूथ पर काम करने वाले बलविंद्र सिंह ने बताया कि शहर के 8 ऑटो प्रीपेड बूथ पर 11 दिव्यांग 2003 से काम कर रहे हैं। उन्हें रोजाना के 314 रुपये के हिसाब से पैसे मिलते हैं। महीने में तीन दिन के पैसे काट कर 8700 रुपये का चेक मिलता है। दस वर्षों से यही चेक मिल रहा है।
बलविंद्र सिंह ने बताया कि 2003 से लेकर अब तक उनकी सैलरी में कोई इजाफा नहीं हुआ है। कई बार अफसरों से मिले लेकिन सुनवाई नहीं हुई। परमजीत सिंह ने बताया कि वह इस बारे में प्रशासक के सलाहकार से भी मिल चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
परमजीत ने बताया कि जब वह एडवाइजर के पास गए तो उन्हें एसएसपी ट्रैफिक के पास जाने को कहा गया। अब एसएसपी कह रहे हैं कि जिस आधार पर उनकी भर्ती हुई है उस हिसाब से उन्हें कहीं और नहीं लगाया जा सकता है। जैसे काम कर रहे हैं वैसे ही काम करना पड़ेगा।
इन लोगों का कहना है कि वह सुबह से लेकर रात तक प्री पेड बूथों पर पूरी ड्यूटी देते हैं। लेकिन अब वह इस शोषण से दुखी हो गए हैं। वैसे तो वह ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करते हैं। लेकिन वह न तो होम गार्ड जवानों में गिने जाते हैं और न ही प्रशासन के किसी विभाग में आते हैं।