प्रो. जगतराम बहुत ही गरीब परिवार में जन्मे थे। उनके पिता किसान थे और अनपढ़ थे। जब वे प्राथमिक स्कूल में पढ़ते थे तो उस समय में उनके पास न तो स्कूल जाने के लिए ड्रेस होती थी और न ही जूते। पढ़ाई में तेज होने के कारण उनके शिक्षक की नजर उन पर पड़ी और पढ़ने-लिखने के साधन उपलब्ध कराए। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। साल 1985 में उन्होंने शिमला के मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की और उसके बाद पीजीआई पहुंचे।
90 हजार से ज्यादा लोगों की लौटाई आंखें
डा. जगतराम अब तक आंखों के 90 हजार से ज्यादा ऑपरेशन कर चुके हैं। इसमें 10 हजार से ज्यादा बच्चों के ऑपरेशन होंगे। जगतराम को ही मोतियाबिंद सर्जरी की पुरानी तकनीक को बदलकर नई सर्जिकल तकनीक देने का श्रेय जाता है। इससे उच्च गुणवत्ता वाले अत्याधुनिक चिकित्सा प्रौद्योगिकी को मामूली लागत पर गरीब जनता को उपलब्ध कराया।
वे नियमित रूप से उपेक्षित और अत्यंत गरीब व्यक्तियों के लिए 135 से अधिक राहत और स्क्रीनिंग शिविरों में नेत्र सर्जन के तौर पर अपनी सेवा दे चुके हैं। उन्हें अमेरिकन सोसाइटी कैटरेक्ट की ओर से बेस्ट ऑफ दी बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जब उन्हें यह पुरस्कार मिला तो उस दौरान अमेरिका का राष्ट्रगान भी बजा।
इन लोगों ने किया था नाम प्रस्तावित
प्रो. जगतराम का नाम पिछली बार पद्मश्री अवार्ड के लिए भेजा था, लेकिन उन्हें निराशा मिली थी। इस बार उनके नाम का प्रस्ताव हिमाचल के गवर्नर आचार्य देवव्रत, पंजाब के गवर्नर व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, पीजीआई के पूर्व डीन व पद्मश्री अमोद गुप्ता व पीयू के पूर्व वाइस चांसलर व पद्मश्री आरसी सोबती ने किया था।