फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चे की मौत के बाद जागा प्रशासन, वाटर बाडी बंद लेकिन जबावदेही नहीं की तय

Tue, 24 Jan 2017 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
बच्चे की मौत के बाद जागा प्रशासन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
दो साल की बच्ची की मौत के बाद नगर निगम की नींद खुली है। सेक्टर-49 के वैली आफ एनिमल्स पार्क की जिस वाटर बाडी में दो साल के बच्चे की मौत हुई है उस बाडी को सोमवार को नगर निगम ने मिट्टी डालकर बंद कर दिया है। जबकि 4 साल पहले भी यहां पर एक बच्चे की मौत हुई थी। उस समय भी तत्कालीन सलाहकार विजय देव ने इसे बंद करने के निर्देश दिए थे लेकिन इसे बंद नहीं किया गया।
विज्ञापन


इसके अलावा पिछले 5 साल से इस वाटर बाडी की कभी सफाई ही नहीं हुई है। इसमे जगह जगह घास और जड़ी बूटी उगी हुई है जिस कारण यह दलदल में बदल गया है। यहां पर सैर करने वालों को यहां से दुर्गंध भी आती थी, इसके बावजूद किसी ने इसकी सुध नहीं ली। हादसा होने के बावजूद भी किसी भी अधिकारी की जबावदेही तय नहीं की गई है। हालांकि मेयर आशा जसवाल ने जांच के निर्देश दे दिए हैं।

महाजन ने 10 दिन पहले की थी शिकायत
पर्यावरण प्रेमी राहुल महाजन ने इस वाटर बाडी की तस्वीर नगर निगम के अधिकारियों को शिकायत के साथ वाट्सएप पर भेजी थी। इसके बावजूद कोई सुध लेने के लिए नहीं आया। महाजन का कहना है कि इस वाटर बाडी के बीच में नारियल के आधा दर्जन पेड़ भी है जो गंदे पानी के कारण अब मर चुके हैं। उनका कहना है कि वाटर बाडी से पानी निकालने के लिए अलग से पाइप भी डाली गई थी लेकिन वह भी जाम है। इस पार्क के बाहर भी दीवार के पास गंदे पानी का तलाब बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूर्व सलाहकार इसे बंद करने के लिए भी कह चुके थे

बच्चे की मौत के बाद जागा प्रशासन - फोटो : अमर उजाला
कई बार वाटर बाडी बंद करने के लिए कह चुके हैं
सेक्टर-49 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार बाली का कहना है कि कई बार अधिकारियों को वाटर बाडी की हालात से अवगत करवाया जा चुका है। जब सलाहकार विजय देव यहां पर आए थे तब भी उन्होंने इसे बंद करने के लिए कहा था लेकिन अधिकारियों ने सलाहकार की भी बात नहीं मानी।

वार्ड पार्षद हीरा नेगी का कहना है कि इससे पहले के पार्षद भी वाटर बाडी न बंद होने के लिए जिम्मेदार हैं। घटना के तुरंत बाद ही इसे बंद करने का फैसला लिया गया और अब काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि पूर्व पार्षद हरफूल चंद कल्याण तो नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं इसके बावजूद भी इसकी सुध नहीं ली गई। मेयर आशा जसवाल का कहना है कि वह खुद भी स्पॉट देखने के लिए गई थी। जांच के आदेश दिए गए हैं। उनका कहना है कि शहर की सभी वाटर बाडीज के हालात चेक करने के लिए भी कहा गया है। उनकी सफाई कराई जाएगी।
चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा का कहना है कि जांच में जो भी अधिकारी दोषी पाया गया उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें