चंडीगढ़ पीजीआई के हेप्टोलॉजी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. आरके धीमान को लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई का निदेशक नियुक्त कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रो.धीमान की नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु तक के लिए की गई है।
डॉ. धीमान ने साल 1993 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर पीजीआई को ज्वाइन किया था। उनकी डाक्टर की पढ़ाई लिखाई यूपी से हुई है। साल 1983 में लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री ली। उसके बाद साल 1991 में संजय गांधी पीजीआई से गेस्ट्रोएंट्रोलाजी में डीएम की डिग्री हासिल की।
हेपेटाइटिस सी को कंट्रोल करने और पूरे देश में इस गंभीर बीमारी के खिलाफ अभियान चलाने में डॉ. आरके धीमान को श्रेय जाता है। पंजाब में हेपेटाइटिस सी काफी तेजी से फैल रहा था। 18 जून साल 2016 को उन्होंने पंजाब सरकार के साथ मिलकर प्रदेश के सभी फिजीशियन को हेपेटाइटिस सी का इलाज करने के लिए ट्रेंड किया। इसमें 22 जिला अस्पताल और तीन मेडिकल कालेज को शामिल किया।
ट्रेनिंग का ही असर था कि पूरे पंजाब में तीन साल के दौरान 80 हजार से ज्यादा हेपेटाइटिस सी से पीड़ित मरीजों का इलाज किया गया। प्रोग्राम इतना हिट रहा कि इसकी डब्ल्यूएचओ ने भी खूब तारीफ की। उसके बाद 28 जुलाई 2018 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. जगत प्रकाश नड्डा ने नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम पूरे देश के लिए लांच किया। इसकी गाइडलाइंस मुंबई में अमिताभ बच्चन ने लांच की, उस दौरान डॉ. धीमान भी मौजूद रहे।
अंगदान को प्रमोट करने में उनका अहम रोल रहा है। उनके प्रस्ताव को चंडीगढ़ प्रशासन ने मानते हुए ड्राइविंग लाइसेंस में आर्गन डोनेशन की शपथ लेने को अंकित कराया। उनके देखरेख में देश में पहली बार पीजीआई ने न्यू सुपर स्पेशिएल्टी कोर्स (डीएम) शुरू किया और लीवर ट्रांसप्लांटेशन प्रोग्राम को लांच किया। उन्हें कई नेशनल और इंटरनेशनल अवार्ड मिल चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी उन्हें डॉ. बीसी राय नेशनल अवार्ड से सम्मानित कर चुकी हैं।