धनतेरस, मंगलवार को नरक चौदस, बुधवार को दीपावली, वीरवार को अन्नकूट व गोवर्धन पूजा और शुक्रवार को भैय्यादूज है। इन पांचों दिनों में शुभ मुहूर्त में पूजा करेंगे तो मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और पैसा ही पैसा बरसेगा।
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धनतेरस से लेकर भैयादूज तक, पांचों दिन का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदारी जरूर करनी चाहिए। भले ही एक छोटा सा चम्मच ही खरीदें। धनतेरस के बाद चारों दिन पूजा का महत्व रहता है। खासकर प्रदोष काल में। सूर्यास्त के ठीक बाद का समय प्रदोष काल माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल में पूजा व अनुष्ठान करना शुभ माना जाता है।
धनतेरस: 18 वर्ष बाद बना विशेष योग
Dhanteras 2018
सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि धनतेरस चार नवंबर रविवार रात 1 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 5 नवंबर सोमवार को रात 11 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। इस बार धनतेरस पर सोम अमृत जयंती योग बन रहा है। ऐसा संयोग 18 वर्षों के बाद बना है।
उन्होंने कहा कि सोम प्रदोष हस्त नक्षत्र कन्या राशि में चंद्रमा त्रयोदशी तिथि में भद्रा न हो तो सोम अमृत जयंती योग बनता है। खरीदारी का सबसे शुभ वक्त सोमवार को दो बजकर 44 मिनट से लेकर शाम पांच बजकर 24 मिनट तक है, क्योंकि सोम अमृत जयंती योग और लाभ और अमृत की चौघड़िया में बर्तन खरीदारी करने से धर्म शास्त्र के अनुसार आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होने के साथ ही रोग का भी नाश होता है। सुबह 10 बजकर 44 मिनट से दोपहर एक बजकर 24 मिनट तक रोग और उद्वेग की चौघड़िया होने के कारण शुभ वक्त नहीं है। हो सके तो इस दौरान खरीदारी न करें।
देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्रीराधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री के अनुसार भगवान धनवंतरी संसार के समस्त रोगों की औषधियों को कलश में लेकर प्रकट हुए थे। उस दिन त्रयोदशी के साथ साथ सोमवार का दिन था। इस वर्ष का धनतेरस का दिन भी सोमवार है। इस दिन बीमारों के लिए दवा खरीदना और उसका सेवन करना फायदा होगा।
नरक चौदस: घर के बाहर दीए जलाने से यमराज होते हैं प्रसन्न
yamraj
सेक्टर-30 के श्री शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री के मुताबिक दीपावली के एक रोज पहले नरक चर्तुदर्शी का पर्व मनाया जाता है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी या फिर रूप चतुर्दशी कहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिन यमराज की पूजा करने और उनके लिए व्रत करने का विधान है।
हनुमान जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि मान्यता के अनुसार इस दिन आलस्य और बुराई को हटाकर जिंदगी में सच्चाई की रोशनी का आगमन होता है। रात को घर के बाहर दिए जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु की संभावना टल जाती है।
यह भी मान्यता है की दीप की रोशनी से पितरों को अपने लोक जाने का रास्ता दिखता है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और पितरों की प्रसन्नता से देवता और देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं.। दीप दान से संतान सुख में आने वाली बाधा दूर होती है। इससे वंश की वृद्धि होती है।
दीपावली: शाम पांच बजकर 57 मिनट से रात आठ बजकर 11 बजे करें पूजा
diwali 2018
सेक्टर 30 के श्रीमहाकाली मंदिर स्थित भृगु जयोतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि घर पर प्रदोष काल का दौरान पूजन का विशेष महत्व है। प्रदोष काल सात नवंबर को शाम पांच बजकर 30 मिनट से लेकर आठ बजकर 11 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल में ही शाम सात बजकर 10 मिनट से रात आठ बजकर 51 मिनट तक शुभ की चौघड़िया रहने के कारण इस योग में दीप प्रज्ज्वलित करना और पूजन करना शुभ रहेगा।
आयुष्मान योग शाम को पांच बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। सौभाग्य योग का प्रारंभ और तुला राशि में चंद्रमा होगा। शाम पांच बजकर 26 मिनट पर सूर्यास्त (प्रदोष काल) के बाद मेष और बृष लग्न एवं स्वाति नक्षत्र के रहने के कारण इस समय में गणेश और लक्ष्मी पूजन प्रारंभ करने के लिए विशेष रूप से शुभ होगा। बही खाता और नवीन शुभ कार्यों के लिए भी यह मुहूर्त अत्यंयत शुभदायक है। फैक्टरी में दोपहर बाद दो बजकर 50 मिनट से चार बजकर 10 मिनट तक चर की चौघड़िया होने के कारण मध्यम है।
इसके बाद चार बजकर 10 मिनट से शाम पांच बजकर 50 मिनट तक मेष लग्न में चर और शुभ की चौघड़िया है। व्यापार और फैक्टरी में पूजा करने का यही सबसे उत्तम मुहूर्त है। रात 10 बजकर 32 मिनट से रात 12 बजकर 12 मिनट तक चर की चौघड़िया शुभ रहेगा। इस समय में महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती की उपासना तांत्रिक क्रियाएं करना तंत्र साधना एवं अनुष्ठान करने का विधान है।
गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा
- फोटो : SELF
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी पंडित ईश्वर दत्त शास्त्री ने बताया कि अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई। इसमें हिन्दू धर्मावलंबी घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर पूजन करते हैं।
उसके बाद गिरिराज भगवान (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। इस दौरान नाना प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं। इस्कॉन और श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में भव्य आयोजन होता है। शिल्पकार व श्रमिक वर्ग इस दिन विश्वकर्मा पूजन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा होती है।
भगवान कृष्ण ने उस दिन इंद्र को छोड़कर गोवर्धन की पूजा की थी इससे इंद्र देवता नाराज हो गए थे और खूब बारिश करवाई। बारिश से हर जगह जलभराव हो गया। पानी भरने से लोगों की जान और पशुओं का खतरा बढ़ गया। उसके बाद कृष्ण ने उंगुली पर गिरीराज को धारण कर पशुधन और लोगों को बचाया।
सेक्टर-15 के जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित राम बहादुर मिश्र ने बताया कि इसे भाई दूज और यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। भइया दूज का यह त्योहार दीपावली के ठीक दो दिन बाद मनाया जाता है। यह भाई-बहन के एक-दूसरे के प्रति स्नेह को अभिव्यक्त करता है।
इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं और उसके उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु के लिए कामना करती हैं। साथ ही भाई अपनी बहन को कुछ उपहार स्वरूप देते हैं। इस बार भाई दूज 9 नवंबर, शुक्त्रस्वार को पड़ रहा है। भइया दूज के दिन बहन के घर में भोजन करने की परंपरा है।
ऋगवेद में वर्णन मिलता है कि यमुना ने अपने भाई यम को इस दिन खाने पर बुलाया था, इसीलिए इस दिन को यम द्वितिया के नाम से जाना जाता है।