चंडीगढ़। कोरोना संक्रमित होने के बाद हर इंसान मानसिक तनाव में आ जाता है, लेकिन तलवार दंपती ने अकेले होने के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति से कोरोना को मात दी। सीनियर सिटीजन स्वदेश तलवार और उनकी पत्नी वनिता तलवार के बच्चे बाहर रहने के कारण अकेले रहते हैं। पिछले महीने दोनों ही कोरोना से संक्रमित हो गए थे।
उन्होंने बताया कि उनके पड़ोस में किसी बुजुर्ग की मौत हो गई थी। वह उनके संस्कार में शामिल हुए थे, जिसके बाद उन्हें बुखार हो गया। अगले दिन ही उनकी पत्नी को भी बुखार हो गया। डॉक्टर ने स्वदेश तलवार को सिटी स्कैन करवाने की सलाह दी। रिपोर्ट में उनकी छाती में इंफेक्शन का पता लगा। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। उन्होंने बताया कि घर पर उनकी पत्नी कोरोना से संक्रमित होकर अकेली लड़ रही थी और अस्पताल में वे। दोनों एक-दूसरे का हालचाल फोन पर ही पूछते थे। उन्होंने कहा इतनी परेशानी होने के बाद भी वह बिल्कुल नहीं डरे। दोनों ने ही कोरोना का डटकर मुकाबला किया। दोनों का मानना है कि जो डर गया वह मर गया। इस दौरान उनके दोस्तों और पड़ोसियों ने खाने की व्यवस्था करवाई।
दादाजी रहे फ्रीडम फाइटर
स्वदेश तलवार ने बताया कि उनके खून में ही लड़ने और जीतने का जज्बा है। उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके पिता कंवर कृष्ण भी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन की कर्मचारी यूनियन के नेता थे। उन्होंने भी कर्मचारियों के लिए काफी संघर्ष किया था।
बुजुर्गों को खाना पहुंचाने की करेंगे सेवा
स्वदेश तलवार ने बताया कि कोरोना के दौरान उन्होंने महसूस किया कि जो सीनियर सिटीजन अकेले रहते हैं उन्हें संक्रमण के बाद खाने की काफी समस्या आती है। इसलिए वह अपनी मित्र अस्तिंदर कौर के साथ मिलकर यह सेवा शुरू करने जा रहे हैं। अस्तिंदर कौर पूर्व अध्यापिका रह चुकी हैं और उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से समान्नित भी की जा चुकी हैं।