सोलह वर्ष बाद आए फैसले पर रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि हम चाहते थे कि दोषी राम रहीम को मौत की सजा हो। लेकिन अदालत ने जो फैसला दिया है, उसका स्वागत करते हैं। आज आए फैसले ने सोलह साल के इंतजार की भरपाई कर दी है। आज हमारी जीत हुई है और न्यायिक प्रणाली पर पहले की तरह हमारा भरोसा अडिग है। अंशुल छत्रपति ने कहा कि राम रहीम ने समाज के चौथे स्तंभ मीडिया पर भी हमला किया था और इसकी सजा उसे दी गई।
दोषियों को मिली सख्त सजा: खट्टा सिंह
छत्रपति हत्याकांड के मुख्य गवाह खट्टा सिंह ने कहा कि क्रिमिनल गुरमीत राम रहीम को उसके गुनाहों की सजा मिली है। उसने साध्वियों से बलात्कार किया और अब हत्या के दोष में सजा मिली है। मामले में इंसाफ के लिए शुरूआत से लेकर वह पीड़ित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर मोर्च पर साथ रहा। कई साल पहले भी उन्होंने राम रहीम की करतूत का पर्दाफाश किया था। गुरुवार को फैसला आने के बाद उन्होंने न्यायिक प्रणाली पर विश्वास जताया और हत्याकांड में दोषियों को सजा मिलने पर खुशी जाहिर की।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषियों को हत्या में आईपीसी की धारा-302, साजिश रचने के तहत आईपीसी-120/बी समेत दोषी निर्मल सिंह को हथियार रखने के लिए 25-54-59 और दोषी कृष्ण लाल को किसी अन्य को हथियार देने के लिए आईपीसी-29-54-59 के तहत सजा दी गई है।
वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से फैसला सुनाते समय सीबीआई विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने दोषी राम रहीम से पूछा कि तुम्हारे कितने बच्चे हैं। साथ ही पूछा कि क्या तुम कुछ कहना चाहते हो। लेकिन राम रहीम ने कुछ भी नहीं कहा और जवाब दिया कि मेरे वकील ही मेरा पक्ष रखेंगे।
जिला अदालत छावनी में रहा तब्दील, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही शहर में
पंचकूला में डेरा प्रमुख राम रहीम और तीन अन्य दोषियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए। इस दौरान जिला अदालत छावनी में तब्दील रहा। यहां पर हरियाणा पुलिस के जवानों की कंपनी और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान तैनात रहे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने दिनभर शहर की सुरक्षा का जायजा लिया। वहीं, प्रशासन की ओर से वीडियोग्राफी के अलावा शहर पर ड्रोन से भी नजर रखी गई।
सुबह से ही कोर्ट के अंदर आने वाली मुख्य सड़क पर नाका लगाया गया। यहां से प्राइवेट वाहनों को एंट्री नहीं दी गई। इसके अलावा सूरज थिएटर के पास पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। यहां से एडवोकेट और सभी लोग पैदल आ रहे थे। जिला अदालत के अंदर और बाहर पुलिस की तैनाती रही। इस दौरान कोर्ट में आने वाले सरकारी कर्मचारियों के भी आई कार्ड और बैग चेक किए गए।
पंचकूला में तैनात सुरक्षाकर्मी
सुबह नौ बजे से लेकर फैसला आने तक रात सात बजे तक पुलिस तैनात रही। पुलिस की ओर से सिटी सील नाका भी लगाया गया। कोर्ट परिसर में डीसीपी कमलदीप गोयल और अन्य पुलिस अधिकारी भी तैनात नजर आए। जिला अदालत में 400 पुलिस कर्मचारियों के अलावा पुलिस की नौ कंपनी और आरएएफ भी तैनात रही। चारों दोषियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होने के बाद भी शहर में धारा-144 लगी रही।
दोबारा हिंसा न हो इसलिए रहा हाई अलर्ट
25 अगस्त 2017 को डेरामुखी ने दो साध्वियों से दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिया था। दोषी करार देने के बाद पंचकूला में हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान 40 लोग मारे गए थे। इसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस ने तगड़ी गश्त की। इसके बाद शहर में शांति का माहौल बना रहा। डीसीपी कमलदीप गोयल ने बताया कि पेशी के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर रहीं।
शहर में होने वाली हलचल को जानने के लिए सिविल वर्दी में बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती की गई थी। घुड़सवारी और अन्य वाहनों पर सवार होकर जवान गश्त करते नजर आए। मीडिया पर्सन को भी अदालत से 200 मीटर दूर रखा गया।
राम रहीम की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई है। शहर में शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। किसी प्रकार की कोई दुर्घटना नहीं हुई है। शहर में सभी जगह हालात सामान्य रहे। - कमलदीप गोयल, डीसीपी, पंचकूला।