डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने कहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और अरविंद केजरीवाल को पंजाबी युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। अपने सियासी फायदे के लिए इनकी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पंजाब के नौजवानों को नशेड़ी कह कर बदनाम कर रही हैं।
पंजाब भवन में प्रेसवार्ता के दौरान शुक्रवार को सुखबीर ने कहा कि इन दोनों पार्टियों को पंजाब के बच्चों केसाथ किए गंभीर अपराध का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी पंजाब केदुश्मनों में शुमार हैं जो यहां के युवाओं को ड्रग एडिक्ट बताते रहते हैं।
सुखबीर ने कहा कि सीएम प्रकाश सिंह बादल ने नशों के खिलाफ लड़ाई का एलान किया। जिसे युवाओं का भरपूर समर्थन मिला। जबकि, कांग्रेस और आप ने पंजाबी युवाओं को पूरी तरह ड्रग एडिक्ट करार देने की साजिश रची।
पंजाब और पंजाबी नौजवानों को दुनिया भर में बदनाम करने के लिए बॉलीवुड मूवी को भी फंडिंग की गई। इन नेताओं को बताना चाहिए कि 70 फीसदी युवा नशे के आदी हैं, का आंकड़ा ये कहां से लाए।
पंजाब ने नशे के खिलाफ देश की लड़ाई लड़ी है
उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल
- फोटो : Amar ujala
सुखबीर बादल ने कहा कि सच यह है कि पंजाब ने नशे के खिलाफ देश की लड़ाई लड़ी है। अगर पंजाब कार्रवाई न करे तो अफगानिस्तान से आने वाले नशे पूरे देश में फैल जाएं। पुलिस भर्ती के दौरान 3.75 लाख युवाओं का टेस्ट किया गया, जिनमें से सिर्फ 1.27 का डोप टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। टेस्ट की जिम्मेदारी बाबा फरीद यूनिवर्सिटी को सौंपी गई थी। बीएफयू के वीसी डॉ. राज बहादुर ने कहा कि टेस्ट का मकसद युवाओं में नशे की आदत की पहचान करना था।
इसके लिए तीन करोड़ की लागत से यूएसएफडीए अप्रूव्ड किट खरीदी गईं। 3.75 लाख में से सिर्फ 4501 युवा पॉजिटिव पाए गए। इनमें से भी कुछ लोगों ने परफॉर्मेंस बेहतर करने को ड्रग ली थी, उन्हें एक और मौका दिया गया तो 1672 ने टेस्ट पास कर लिया। डॉ. राज बहादुर ने बताया कि स्टडी के मुताबिक दुनिया और एशिया में ओपिऑयड इस्तेमाल 0.3 प्रतिशत है, भारत में यह 0.7 प्रतिशत है। जबकि, पुलिस भरती में यह सिर्फ 0.33 प्रतिशत पाया गया।
उन्होंने कहा कि आंकड़े साबित करते हैं कि पंजाब में ड्रग एब्यूज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय औसत से काफी कम है। डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने बताया कि 2014 में पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ 14483 केस दर्ज किए गए। जोकि देश का 31 प्रतिशत है। इसी तरह 2013 में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत केस और सीजर देश के 38 फीसदी थे। देश की 46 प्रतिशत हेरोइन रिकवरी भी पंजाब से है। पंजाब में 195 नशा तस्करों की 227 करोड़ की प्रॉपर्टी भी फ्रीज की गई है। साल 2015 में सजा की दर 81 फीसदी रही।