शहीद के परिवार से मिलते सीएम मनोहर लाल
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हरियाणा से ताल्लुक रखने वाला कोई भी फौजी अब युद्ध या आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद होता है तो उसके आश्रितों को राज्य सरकार तत्काल आर्थिक मदद देगी। आश्रितों को दी जाने वाली इस मदद को लंबी औपचारिकताओं में लटकाया नहीं जाएगा।
इस संबंध में राज्य सरकार ने एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने बताया कि हरियाणा सरकार ऐसी पहली सरकार है, जिसने शहीदों को सम्मान देने के लिए ऐसा कदम उठाया है। उनके अनुसार, शहादत के बाद यदि मदद और मुआवजे के लिए शहीद के परिजनों को भटकना पड़े तो इससे बड़ी विडंबना क्या होगी? लिहाजा हरियाणा सरकार ने इस संबंध में नियमों में थोड़ा बदलाव किया है।
अब नहीं होगा कमांडिंग अफसर के पत्र का इंतजार
शहीद के परिवार को मिलेगी मदद
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अब तक शहीद के आश्रितों को मदद राशि एवं मुआवजा दिए जाने के लिए लंबी औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ता था। हरियाणा से ताल्लुक रखने वाला शहीद सेना की जिस यूनिट व ब्रिगेड से संबद्ध होता था, वहां का कमांडिंग अफसर जवान की शहादत के बारे में एक संस्तुति पत्र के साथ रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को भेजता है और वहां से रिपोर्ट संबंधित राज्य सरकार को भेजी जाती है।
कमांडिंग अफसर के संस्तुति पत्र और रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर ही शहीद के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से मदद राशि एवं मुआवजा उपलब्ध करवाई जाती है। इस प्रक्रिया में कई दिन गुजर जाते थे। मंत्री कृष्ण बेदी के अनुसार, अब हरियाणा सरकार ने इस नियम में बदलाव किया है, सरकार शहीद के आश्रितों को मदद राशि देने में अब कमांडिंग अफसर के पत्र का इंतजार नहीं करेगी। उनके अनुसार, संस्तुति पत्र और रिपोर्ट आने की औपचारिकताएं बाद में पूरी होती रहेंगी, सरकार शहादत के तुरंत बाद ही मदद राशि जवान के परिजनों को उपलब्ध करवा देगी।