चंडीगढ़। शहर के वर्षों पुराने मसलों को सुलझाने के लिए केंद्र ने अब नई पहल शुरू की है। इन मुद्दों पर अब शहर के विभाग प्रमुख सीधे केंद्र के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे।
बीते शनिवार को मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अतिरिक्त सचिव के साथ इन मुद्दों पर पहले दौर की बैठक की थी। इसके बाद मुख्य सचिव ने उपायुक्त निशांत कुमार यादव को लाल डोरा, नीड बेस्ड चेंज, बिल्डिंग वॉयलेशन, शेयर-वाइज रजिस्ट्री और पुनर्वास कॉलोनियों में मालिकाना हक जैसे विषयों पर ग्राउंड लेवल से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने इस मामले में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, एस्टेट ऑफिस, सोसाइटीज, इंडस्ट्रीज और अन्य विभागों के प्रमुखों को भी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक अब केंद्र इन विभागों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर बीते 30-40 वर्षों की स्थितियों से लेकर मौजूदा हालात और भविष्य के समाधान पर रिपोर्ट मांगेगा। संभावना है कि आने वाले दिनों में केंद्र एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करेगा जिसमें केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन दोनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी सभी मुद्दों पर ठोस निर्णय की दिशा में काम करेगी।
लंबित प्रमुख मुद्दे
नीड बेस्ड चेंज: यह मुद्दा शहर के लगभग हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है। हाउसिंग बोर्ड के मकानों से लेकर शोरूम, सोसाइटीज, दुकानों और इंडस्ट्रीज तक — अधिकांश संपत्तियां नीड बेस्ड चेंज की जद में हैं। कई लोगों पर 30 से 40 साल पुराने नोटिस चल रहे हैं।
बिल्डिंग वॉयलेशन और मिसयूज: कई संपत्तियों पर नियमों के उल्लंघन के केस दर्ज हैं, जिन पर जुर्माने की राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है।
लाल डोरा का विस्तार: शहर के 22 गांवों को नगर निगम में शामिल करने के बावजूद लाल डोरा की समस्या अब भी बरकरार है। यह मुद्दा हर चुनाव में उठता है लेकिन समाधान अधूरा है।
शेयर-वाइज बिक्री और अपार्टमेंटलाइजेशन: यह मामला भी वर्षों से अटका है। संपत्तियों की शेयर-वाइज बिक्री को लेकर प्रशासनिक और कानूनी पेचीदगियां बनी हुई हैं।
पुनर्वास कॉलोनियों में मालिकाना हक: पुनर्वास कॉलोनियों के हजारों निवासियों को अभी तक मालिकाना हक नहीं मिला है। इस पर भी केंद्र ने स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है।
सांसद मनीष तिवारी ने संसद में उठाई थी आवाज
इन सभी पांचों प्रमुख मुद्दों को सांसद मनीष तिवारी इस वर्ष संसद में उठा चुके हैं। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चंडीगढ़ प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। केंद्र ने शेयर-वाइज बिक्री, लाल डोरा, ग्रुप हाउसिंग और मालिकाना हक जैसे विषयों पर ताजा स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि, प्रशासन की ओर से भेजे गए अधिकांश जवाब नकारात्मक रहे लेकिन तिवारी ने उम्मीद जताई कि केंद्र इन मुद्दों के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाएगा।