जिले के ट्रांसपोर्ट विभाग ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के एवज में आवेदनकर्ता एक्टिविस्ट से पांच करोड़ रुपये बतौर फीस मांगे हैं।
आरटीआई एक्टिविस्ट करणदीप सिंह कैरों ने विभाग से बीते दस वर्षों में जारी वीआईपी नंबरों की डिटेल मांगी थी। विभाग ने तर्क दिया कि जो जानकारी मांगी गई है, उसके जवाब के लिए कागजों की संख्या दस लाख है। ऐसे में पचास रुपये प्रति कॉपी के हिसाब से पांच करोड़ रुपये फीस बनती है। फीस जमा कराने के बाद ही जानकारी दी जा सकती है।
एक्टिविस्ट की आरटीआई: करणदीप ने पिछले साल अक्तूबर में विभाग में आरटीआई डाली थी। इसमें पिछले दस साल में वीआईपी नंबर से आए पैसे, नंबर किस किस को दिए गए और कितने के दिए गए हैं, के बारे में पूछा गया था। साथ ही उन्होंने वीआईपी नंबरों की आरसी के दस्तावेज की भी मांग की थी। करणदीप ने कहा कि पहली अक्तूबर में आरटीआई का कोई जवाब नहीं आया।