चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के खिलाफ एमएससी छात्र ने दाखिल की थी याचिका
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को नए सिरे से दावे पर विचार करने का दिया आदेश
चंडीगढ़। हिसार के चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय को एमएससी के मेधावी छात्र को स्वर्ण पदक देने से इनकार करना भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए छात्र के दावे पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है।
राकेश कुमार ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया था कि विश्वविद्यालय की ओर से उसे एमएससी में मनमाने ढंग से स्वर्ण पदक देने से मना कर दिया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है और शैक्षणिक संस्थानों पर उच्च जिम्मेदारियां होती हैं। इनसे न केवल छात्रों के करियर के प्रति संवेदनशील होने की, बल्कि उनसे अपने स्वयं के नियमों का पालन करने की भी अपेक्षा की जाती है। एक बार जब कोई स्पष्ट कानून बना दिया जाता है तो उसकी व्याख्या अपने शब्दों में कर वर्गीकरण नहीं किया जा सकता। मुद्दा यह है कि क्या याचिकाकर्ता नियमों के तहत पदक के लिए हकदार है। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस तर्क को खारिज कर दिया कि यदि याचिकाकर्ता के 25 क्रेडिट घंटे प्राप्त नहीं किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह तर्क टिकने योग्य नहीं है, छात्र ने पहले वर्ष के अंत में 25 क्रेडिट घंटे पूरे किए थे। क्रेडिट घंटों का कोई और उप-वर्गीकरण नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज रिकाॅर्ड में नहीं है, जिससे पता चले कि कुलपति ने अपने विवेक का इस्तेमाल कर निर्णय लिया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को याची के दावे पर फिर से विचार करने का आदेश देते हुए 25,000 रुपये जुर्माना लगाया है।