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Chandigarh News: फिर उठी अहीर रेजिमेंट की मांग, रघुवेंद्र यादव बोले- चुनाव से पहले घोषणा नहीं तो होगा आंदोलन

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चंडीगढ़। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले देश में एक बार फिर अहीर रेजिमेंट की मांग उठ सकती है। रेजांग ला डे के मौके पर सेक्टर-48 के एक निजी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में ट्राइसिटी यदुवंशी महासभा के महासचिव रघुविंदर यादव पहुंचे। उन्होंने कहा कि अहीर रेजिमेंट के लिए केंद्र में उच्च स्तर पर बातचीत चल रही है। चुनाव से पहले उम्मीद है कि फैसला हो जाएगा। ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे। रघुविंदर यादव ने कहा कि रेजांग ला युद्ध में 120 अहीर जवानों ने आखिरी दम तक युद्ध किया और जब तक एक भी जवान जिंदा रहा, उसने हार नहीं मानी। पिछले काफी समय से अहीर रेजिमेंट की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव से पहले इसकी घोषणा कर दी जाएगी। बताया कि महासभा की केंद्र सरकार में उच्च स्तर पर बातचीत चल रही है। हाल ही में भारत सरकार को नोट भी भेजा है। रक्षामंत्री के साथ भी महासभा संपर्क में है। इस मांग ने पिछले साल काफी जोर पकड़ा था। इसके बाद केंद्र सरकार से आश्वासन मिला, जिसकी वजह से अभियान को थोड़ा कम किया गया। उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव से पहले अहीर रेजिमेंट पर फैसला हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है कि महासभा आंदोलन की राह अपनाएगी। कार्यक्रम के दौरान पूर्व आईएएस विवेक अत्रे और कर्नल डीएस चीमा (सेवानिवृत्त) ने रघुविंदर यादव को सम्मानित भी किया। बता दें कि केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा, लालू प्रसाद की बेटी राज लक्ष्मी यादव समेत विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने अहीर रेजिमेंट की मांग उठाई है। कई आंदोलन भी हुए। सपा ने तो 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में अहीर रेजिमेंट का वादा किया था।
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रेजांग ला की लड़ाई से है अहम रिश्ता
रेजांग ला की लड़ाई में 117 अहीर सैनिकों की शौर्य की चर्चा आज भी होती है। यह सभी जवान कुमाऊं रेजीमेंट की 13वीं बटालियन के हिस्सा थे। इन जवानों की वीरता के सामने चीन के सैनिकों को झुकना पड़ा था। इसके बाद भारतीय सेना ने रेजांग ला चौकी बचा ली थी। इस लड़ाई में 120 सैनिकों ने चीन के सैकड़ों चीनी सैनिकों को मार गिराया था। 117 जवान शहीद हो गए थे, जिसमें 114 अहीर थे।

कई राजनीतिक पार्टियों के नेता उठा चुके हैं अहीर रेजिमेंट की मांग
भारतीय सेना में सिख रेजिमेंट, गोरखा, राजपूत, मराठा जैसे अलग-अलग रेजिमेंट हैं। हालांकि यह व्यवस्था सिर्फ थल सेना में ही है। यह एक तरीके से सेना टुकड़ियां होती हैं। इन सभी टुकड़ियों को मिलाकर सेना पूरी होती है। सेना में रेजिमेंट का बंटवारा ब्रिटिश काल में ही हुआ था। तब अंग्रेजों ने भर्तियां कभी जाति के आधार पर की तो कभी समुदाय के आधार पर। बाद में इसी आधार पर रेजिमेंट बना दी गईं। अहीर जवानों को कुमायूं, जाट, राजपूत और अन्य रेजिमेंट में अलग-अलग जाति के जवानों के साथ भर्ती किया जाता है। लगातार मांग उठ रही है कि अहीर की अलग रेजिमेंट हो।
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