उन्होंने कहा कि दिल्ली चुनाव में से बाहर निकलना स्पष्ट तौर पर अकाली दल की मजबूरी थी क्योंकि इन्हें इस बात का भलीभांति एहसास है कि जमीनी स्तर पर उन्हें कोई समर्थन नहीं है और राष्ट्रीय राजधानी में यह एक भी सीट नहीं जीत सकते। ऐसा भी लगता है कि भाजपा अकाली दल को वह कुछ देने के लिए तैयार नहीं थी जो सीटों के रूप में अकाली चाहते थे जिस कारण उन्होंने स्थिति में से बाहर निकलने का बेहतर ढंग ढूंढा।
कैप्टन ने कहा कि इसमें कोई हैरानी नहीं कि शिअद की हालत बहुत नाजुक है और पंजाब में भी वह जमीनी आधार खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल अंदरूनी लड़ाई का सामना कर रहा है और पार्टी टूटने की कगार पर खड़ी है। मुख्यमंत्री ने अकालियों से कहा कि संवेदनशील और नाजुक मसले पर झूठे दावे और विपरीत स्टैंड लेकर लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश न करें क्योंकि इस मसले पर देश का भविष्य टिका हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘आप लोगों से आशा नहीं कर सकते कि वह यह विश्वास करें कि आप गंभीर हो, वह भी उस समय जब आप संसद में भाजपा और केंद्र में सरकार के साथ खड़े हो।’’
'सीएम बताएं कि वह पीड़ित सिखों को मिली राहत के खिलाफ हैं'
शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल ने कहा है कि सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह यह स्पष्ट करें कि वह सीएए के तहत सिखों को मिली राहत के खिलाफ हैं। क्या वह सीएए के तहत सिखों को मिली राहत खत्म करवाने को एक्ट रद्द करवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। सुखबीर ने कहा कि कैप्टन सिर्फ कांग्रेस का सिख विरोधी एजेंडा पूरा कर रहे हैं।
अगर वे पड़ोसी देशों के सिखों को राहत देने को संजीदा हैं तो उन्हें शिअद की एक्ट में मुस्लिमों को शामिल करने की मांग का समर्थन करना चाहिए। पाक के आंकड़ों के मुताबिक वहां 1000 हिंदू, सिख लड़कियों का अपहरण कर धर्म परिवर्तन करवाया गया। अकाली दल ने सिखों को बचाने के लिए नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में वोट दिया था। पर इसमें मुस्लिमों को शामिल करने की मांग कर पार्टी ने अपना विरोध भी जता दिया था। इस मुद्दे पर सैद्धांतिक स्टैंड छोड़ने के बजाय हमने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ना छोड़ दिया है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ है।