इलाज में लापरवाही बरतने के कारण व्यक्ति की मौत हो गई थी। मामले में हेल्थकेयर एट होम को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया गया है। कंपनी पर दस लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। कंपनी को सारा भुगतान 45 दिनों में करना होगा। इस संबंधी फोरम में सेक्टर-71 निवासी महिंदर पाल सिंह ने केस दायर किया था।
महिंदर पाल शर्मा ने बताया कि उनके पिता सतपाल शर्मा 2014 में सरवाइकल व सांस की बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने अपने पिता का इलाज फोर्टिस अस्पताल से करवाया। इस दौरान डॉक्टरों ने उन्हें पिता को घर पर पूरी तरह से डॉक्टरी तरीके से देखभाल करवाने की सलाह दी। अस्पताल में ही उनकी हेल्थकेयर एट होम प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली से उनकी मुलाकात हुई।
कंपनी की बातों में आकर उन्होंने कंपनी के साथ एमओयू साइन कर लिया। जिसके बाद कंपनी की तरफ से एक महिला मुलाजिम को उनके पिता की देखभाल के लिए भेज दिया गया। पिता को सांस की समस्या आई तो कमरे में रखे आक्सीजन वाले सिलेंडर की बजाए लेड़ीज स्टाफ की लड़की ने उन्हें निबूलाजेशन वाला मास्क मुंह पर लगा दिया। जिससे आक्सीजन लीक होती रही व पिता सांस की समस्या से परेशान होते रहे।
इसी तरह आठ मई 2014 को अस्पताल की तरफ से लगाई पेशाब की नाली को बदलने के लिए ऐसी लापरवाही बरती गई। पाइप गलत फिट हो गई। वहीं, पेशाब न आने पर जब शिफ्ट बदलने पर दूसरी लड़की आई तो पता चला कि पाइप गलती लगी है। जब उसने पाइप निकाली तो वह लहु लुहान हो गए। इसी बीच उक्त स्टाफ वहां से फरार हो गया।
साथ ही वह खुद ही पिता को लेकर अस्पताल गए। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि यूरीन पाइप गलत लगने से उनका यूरीन ब्लैडर फट गया है। अस्पताल में डॉक्टरों ने डिस्चार्ज रिपोर्ट मे भी यह बात लिखी है। इसी तरह 18 सितंबर 2014 को उनके पिता की मौत हो गई।