जन्मजात हृदय रोग के 50% मामलों में कारण का पता नहीं चलता। मां बनने में देरी जन्मजात हृदय रोग के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है, क्योंकि इससे खतरा काफी बढ़ जाता है। सही उम्र में शादी, फिर संतान सुख बेहद जरूरी है।
अमेरिका के यूटी साउथ वेस्टर्न मेडिकल सेंटर के एक्स-विवो लंग परफ्यूजन के सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. जॉन म्यूरल ने यह जानकारी यहां सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक कार्डियक क्रिटिकल केयर (एसपीसीसीसी) के सम्मेलन में दी।
उन्होंने बताया, अमेरिका में भी जन्मजात हृदयरोग के मामले भारत के बराबर ही हैं, लेकिन वहां गर्भावस्था के दौरान 90% मामलों में पता चल जाता है, जिससे समय रहते इलाज से बच्चों की मौत को नियंत्रित करने में सफलता मिल जाती है। उन्होंने बताया, गर्भधारण के 18 से 22वें दिन के बीच हृदय का निर्माण शुरू हाेता है। चार हफ्ते में भ्रूण में धड़कन शुरू हो जाती है। करीब 9 हफ्ते में हृदय विकसित हो जाता है। इस दौरान किसी भी तरह का नशा नहीं करना चाहिए।
दिल में छेद की समस्या सर्वाधिक
जन्मजात हृदयरोग में कई तरह की समस्याएं होती हैं, लेकिन सबसे सामान्य दिल में छेद होना है। रक्तसंचार की प्रक्रिया बाधित होती है। फेफड़े में सही ढंग से खून नहीं पहुंचता।
- डॉ. जॉन म्यूरल ने कहा कि पेटेंट डक्शन आर्टिरियोसिस नली का बंद न होना भी समस्या है। मां के गर्भ से बाहर निकलने के बाद बच्चे के हृदय में पाई जाने वाली यह नली खुद बंद हो जाती है। ऐसा न होने पर हृदय ठीक तरह से काम नहीं करता।