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शहर में आज रक्षा मंत्री, 'माई भागो' का करेंगे उद्घाटन

Sat, 25 Jul 2015 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
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मोहाली के सेक्टर 66 में बनाए गए माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेयरेटरी इंस्टीट्यूट का उद्घाटन शनिवार को होगा। रक्षामंत्री मनोहर परिकर और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सुबह साढ़े दस बजे इसका शुभारंभ करेंगे।
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यह देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है जहां लड़कियों को फौज में बतौर अफसर भर्ती होने को आधुनिक ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे पहले पंजाब सरकार ने लड़कों के लिए महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेयरेटरी इंस्टीट्यूट शुरू किया था। उसकी सफलता के बाद ही यह संस्थान शुरू किया जा रहा है।

इंस्टीट्यूट परिसर में ही उद्घाटन समागम करीब डेढ़ घंटे चलेगा, जिसमें मुख्य मंच पर परिकर और बादल के साथ पंजाब के मंत्री, सीपीएस, सांसद, विधायक, प्रदेश भाजपा प्रधान और फौज के आला अफसर बैठेंगे। बाएं ओर मौजूदा और पूर्व फौजियों के लिए मंच बनाया गया है, जबकि, दाहिनी तरफ के मंच पर सभ्याचारक कार्यक्रम होगा।
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समागम में पंजाब के स्कूलों से एनसीसी की तीन सौ लड़कियां, कपूरथला सैनिक स्कूल के दो सौ स्टूडेंट्स, पेस्को के डेढ़ हजार पूर्व फौजी, सी-पाइट के साढ़े तीन सौ ट्रेनीज के अलावा ग्रामीण इलाकों की युवतियों को न्योता दिया गया है। समागम की सुरक्षा में करीब डेढ़ हजार पुलिस फोर्स तैनात की गई है। जिसकी अगुवाई सात एसएसपी करेंगे।

इसके अलावा पांच एंटी सैबोटॉज व क्विर रिएक्शन टीमें तैनात की गई हैं। रक्षामंत्री परिकर हेलीकॉप्टर से नाइपर में लैंड करेंगे, वहां से समागम स्थल पहुंचेंगे। दो और वैकल्पिक लैंडिंग का इंतजाम किया गया है।

माई भागो के नाम पर बनाया संस्थान: माई भागो सिख कौम की महान वीरांगना और संत थीं। 1705 में मुगलों और पहाड़ी राजाओं ने आनंदपुर साहिब को घेर लिया था। मुगलों ने कहा कि जो भी कहेगा कि वह गुरु गोबिंद सिंह का सिख नहीं, उसे जाने दिया जाएगा। तो माहन सिंह की अगुवाई में 40 सिख बेदावा लिख कर वहां से चले गए।

यह पता लगने पर माई भागो बहुत दुखी हुईं। क्रोधित माई भागो ने उन सिखों को रोका, उनके व्यंग्यों से वे शर्मिंदा हुए और गुरु गोबिंद सिंह से माफी मांगने चल पड़े। मालवा में माई भागो ने मुगल सेना को ललकारा और उनके दांत खट्टे कर दिए।

गुरु जी भी युद्ध में पहुंच गए। इसमें सभी 40 सिख मारे गए, जोकि मुक्ते कहलाए। सिर्फ गुरु गोबिंद सिंह और माई भागो जीवित बचे। उसके बाद माई भागो, गुरु जी की अंगरक्षक बन कर उनके साथ ही रहीं। गुरु जी क़े निधन के बाद वह कर्नाटक चली गईं।
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