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किसानों को जल्द करें फसल खरीद का भुगतान, धान की खेती पर न लगाएं पाबंदी: दीपेंद्र हुड्डा

Fri, 15 May 2020 08:42 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • उपमुख्यमंत्री की नेता प्रतिपक्ष की उम्र पर की गई टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण  
  • कहा- 
  • हाईकोर्ट के सिटिंग जज या स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए शराब घोटाले की जांच    
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दीपेंद्र हुड्डा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा है कि पहले फसल की खरीद फिर उठान और अब पेमेंट में देरी से किसानों के सब्र का बांध टूट रहा है। सरकार ने तीन दिन में पेमेंट करने का वादा किया था लेकिन तीन हफ्ते बाद भी किसानों को भुगतान नहीं हुआ है। क्योंकि सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया है कि इससे किसान और आढ़ती दोनों परेशान हैं। वह डिजिटल प्रेस वार्ता में पत्रकारों से रूबरू हुए।

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खुद कृषि मंत्री ने दो दिन पहले कहा था कि सरकार की तरफ से किसानों को सिर्फ 25 अप्रैल तक का ही भुगतान हुआ है। पिछले 20 दिनों की खरीद का किसान को एक भी पैसा नहीं दिया गया। सरकार ने गेहूं का अब तक 12,500 करोड़ में से बमुश्किल 1500 करोड़ रुपये ही किसानों को दिए हैं, जबकि 11000 करोड़ रुपये अभी लंबित है। 

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दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में अब तक करीब 65 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। जबकि अनुमानित आवक 120 लाख मीट्रिक टन के करीब है। इसलिए सरकार को वादे के मुताबिक दाना-दाना गेहूं का खरीदना चाहिए और वक्त पर भुगतान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि खरीद के मुकाबले मंडियों से उठान और धीमा है। 

धान बुआई पर लगाई गई पाबंदी का विरोध

अबतक करीब 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं का ही उठान किया गया है। बाकी का लाखों मीट्रिक टन गेहूं हर बारिश में भीगकर मंडियों में पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। दीपेंद्र ने सरकार की तरफ से कई ब्लॉक में धान बुआई पर लगाई गई पाबंदी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को फौरन वापस लेना चाहिए। भारतीय किसान यूनियन समेत तमाम किसान संगठन इसकी मांग कर रहे हैं। 

भाकियू की इस मांग का हम पूरी तरह समर्थन करते हैं। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी सरकार के सामने ये मांग उठा चुके हैं। लेकिन उनकी जायज मांग पर ध्यान देने की बजाए उप-मुख्यमंत्री का नेता प्रतिपक्ष की उम्र पर बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि इंसान की उम्र सरकार नहीं भगवान तय करता है।

अगर उन्हें लगता है कि 60-70 साल के किसी नेता या इंसान को भावी पीढ़ी की फिक्र नहीं है तो क्या मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को भी वो इसी नजरिए से देखते हैं। मुख्यमंत्री को भी बताना चाहिए कि क्या वो उप-मुख्यमंत्री की इस सोच से इत्तेफाक रखते हैं? भाजपा सरकार को किसानों पर बंदिशें लगाने की बजाए, भूजल रिचार्ज के लिए कांग्रेस कार्यकाल से सीख लेकर नई तकनीक व परियोजनाएं शुरू करनी चाहिए। 
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दीपेंद्र ने कहा कि सरकारी विभाग अपने कर्मचारियों की छंटनी कर रहे हैं। सरकार की तरफ से कई सफाई कर्मियों और वोकेशनल टीचर्स के बाद अब टूरिज्म डिपार्टमेंट के भी कई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

अगर सरकार खुद कर्मचारियों को नौकरी से निकालेगी तो वो प्राइवेट सेक्टर को ऐसा करने से कैसे रोकेगी। स्वास्थ्य कर्मियों की तर्ज पर सफाई कर्मियों, पुलिस कर्मचारियों और ड्यूटी पर तैनात तमाम कर्मचारियों को महामारी के दौरान डबल सैलरी और विशेष बीमा देना चाहिए।

हाईकोर्ट के सिटिंग जज या स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए शराब घोटाले की जांच  
दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा में लॉकडाउन के दौरान हुए शराब घोटाले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज या स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ एक गोदाम नहीं, बल्कि लॉकडाउन के दौरान पूरे हरियाणा में हुई अवैध शराब बिक्री की जांच करानी चाहिए। मामले में दोषी बड़े से बड़े शख्स पर कार्रवाई हो। जनता इस जांच पर पूरा विश्वास कर पाए इसलिए हाईकोर्ट के सीटिंग जज या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराएं। यह बहुत बड़ा घोटाला है।
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