फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महामारी को देखते निर्णय सही, होनहार विद्यार्थियों को होगा नुकसान

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। सीबीएसई की ओर से दसवीं व बारहवीं के स्टूडेंट्स को बिना एग्जाम दिए पास करने की योजना वर्तमान के समय के मुताबिक ठीक है, लेकिन इससे होनहार विद्यार्थियों को बड़ा नुकसान होगा। परेशान वह भी होंगे, जिन्होंने पिछली परीक्षाओं में किसी कारणवश कम अंक हासिल किए हैं और वह फाइनल एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं। क्योंकि पिछले मूल्यांकन के आधार पर उसे फाइनल में भी अंक कम मिलेंगे। इससे नौकरी में दिक्कत आ सकती है। कालेज में एडमिशन को लेकर चिंता बढ़ सकती है। यदि एंट्रेस एग्जाम हुआ तो होनहार बच्चे आगे बढ़ जाएंगे। मेरिट से एडमिशन हुए तो सभी को दाखिला मिल जाएगा, लेकिन एडमिशन देने वाले संस्थानों के लिए मानक बनाना चुनौती होगी।
विज्ञापन

पीयू में टेस्ट प्रक्रिया है, कमजोर विद्यार्थी दाखिला नहीं ले पाएंगे
पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रजत संधीर ने बताया कि सीबीएसई के फार्मूले से होशियार विद्यार्थियों को नुकसान होगा क्योंकि वह तैयारी में जुटे थे। कमजोर विद्यार्थी बाजी मार लेंगे। उन स्टूडेंट्स को भी नुकसान होगा, जो पहले तीन एग्जाम में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे, लेकिन फाइनल में बेहतर अंक लाने की तैयारी में जुटे थे और फाइनल एग्जाम हुआ नहीं। नौकरी आदि के लिए जब यह स्टूडेंट्स आवेदन करेंगे तो उन विद्यार्थियों को संस्थान प्राथमिकता देंगे, जो एग्जाम पास कर के आए होंगे। एडमिशन के लिए पीयू में टेस्ट प्रक्रिया है, इसमें कमजोर स्टूडेंट्स नहीं आ पाएंगे, भले ही वह बारहवीं में प्रमोट होकर आए हों।
नौकरी में दिक्कतें आ सकती हैं
पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेएस सहरावत ने बताया कि प्रैक्टिकल आदि में 80-80 फीसदी अंक दिए जाएंगे। क्या कभी ऐसा संभव हुआ है। यह प्रक्रिया गलत है। कमजोर विद्यार्थी आगे बढ़ेंगे और होशियार पीछे छूट जाएंगे। एडमिशन जब लेने जाएंगे और यदि मेरिट से एडमिशन हुए तो सभी स्टूडेंट योग्य हो जाएंगे। किसी में कोई अंतर नहीं रहेगा। कुछ स्टूडेंट्स इस व्यवस्था से गलत कदम उठाने की ओर भी जा सकते हैं। नौकरी पाने में भी इन स्टूडेंट्स को दिक्कतें आएंगी।
विज्ञापन

सीबीएसई का निर्णय सही है
पीयू के प्रोफेसर विशाल शर्मा ने बताया कि सीबीएसई ने समय को देखते हुए जो निर्णय लिया है वह सही है। हर बच्चे की जान कीमती है। भारत में ऑनलाइन एग्जाम देने की व्यवस्था होनी चाहिए थी। यदि ऐसा होता तो इस हालात में भी परीक्षा कराना संभव होता। रही बात एडमिशन लेने की तो कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में दाखिले स्टूडेंट्स को मिल जाएंगे। मेरिट के आधार पर हो या कोई अन्य तरीका। यह संस्थानों को तय करना होगा। टेस्ट के आधार पर एडमिशन होने पर वही स्टूडेंट बाजी मार पाएंगे जो काबिल होंगे।
बिना परीक्षा दिए औसत अंक देना गलत
पंजाब इंजीनियरिंग कालेज के डायरेक्टर धीरज सांघी का कहना है कि बिना परीक्षा दिए किसी विषय में औसत अंक देना गलत है। अब कालेजों को भी देखना होगा कि वे दाखिले में क्या बदलाव करते हैं। जिन कालेजों में 12वीं के अंक के आधार एडमिशन होगा, वहां विद्यार्थियों को दिक्कत आ सकती है। ऐसे में इस निर्णय के बाद कालेजों को भी एडमिशन प्रक्रिया के बारे में सोचना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें