चंडीगढ़। पीयू शासन सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के पास संकाय डीन की नए सिरे से तैनाती के लिए सर्वाधिक सुझाव आए हैं। सुझावों में कहा गया है कि संकाय डीन विभागों के ही प्रोफेसरों को बनाया जाए। इसके लिए विभागों में रोटेशन बनाया जाए। डीन का कार्य अहम होता है, ऐसे में उन्हें कार्यालय के साथ स्टाफ भी दिया जाना चाहिए। इसके अलावा राजनीति से बचाने के लिए संकाय डीन को सीनेट व सिंडिकेट से मुक्त किया जाए। सूत्रों का कहना है कि समिति डीन चुनाव वाले बिंदु पर आमूलचूल परिवर्तन करेगी।
ये है डीन बनाने की प्रक्रिया
पीयू 11 संकाय डीन का चुनाव करती है। इनमें कला, विज्ञान, मेडिकल, पशुपालन, औषधि, इंजीनियरिंग, प्रबंधन आदि शामिल हैं। डीन का चुनाव सीनेट के जरिए किया जाता है। इस चुनाव में कोई भी व्यक्ति हिस्सा ले सकता है। डीन का कार्य विभागों के पाठ्यक्रम में बदलाव से लेकर विद्यार्थियों के हित में लिए जाने वाले निर्णय आदि शामिल हैं। यह महत्वपूर्ण पद है। उनकी मुहर के जरिए ही विभागों में बदलाव होता है। हर साल नए डीन बनाए जाते हैं।
कई संकायों के डीन विभागों के जानकार नहीं
डीन चुनाव के जरिए बनते हैं। इस प्रक्रिया का विरोध बड़ी संख्या में शिक्षक कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे मेहनत कर प्रोफेसर बनते हैं। लंबा संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन चुनाव के जरिए कोई भी व्यक्ति डीन बन जाता है। तमाम तो ऐसे डीन बनते हैं जो संबंधित संकाय के विशेषज्ञ नहीं होते। ऐसे में निर्णय लेने को लेकर सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि संकाय के पाठ्यक्रम के बारे में उन्हें जानकारी नहीं होती। इसी में बदलाव की बात कही गई है।
क्या चाहते हैं शिक्षक
पीयू के वरिष्ठ शिक्षकों ने समिति को सुझाव दिया है कि डीन तैनाती के लिए विशेष बदलाव की आवश्यकता है। इसके लिए पूरी गाइडलाइन बदली जानी चाहिए। डीन विशेषज्ञ रखा जाए और उसी संकाय से हों। संकाय में शिक्षकों को रोटेशन बनाया जा सकता है जो बारी-बारी से डीन बनेंगे। प्रोफेसर ही इस पद पर बेहतर कार्य कर सकते हैं। समिति को दिए सुझाव में शिक्षकों ने कहा है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लिया जाए और सीनेट व सिंडिकेट से इस पद को मुक्त किया जाए। चुनाव की प्रक्रिया तो इस पद के लिए बिल्कुल न हो। सूत्रों का कहना है कि शिक्षक चाहते हैं कि विभागीय कार्यों मेंकोई बाहरी व्यक्ति दखल न दे।