हरियाणा विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति के मतदाताओं ने क्षेत्रीय पार्टियों को दरकिनार कर राष्ट्रीय पार्टियों के हक में मतदान किया है। दलित मतदाताओं के हकों की पैरोकार होने का दावा करने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) व आजाद समाज पार्टी (एएसपी) के साथ गठबंधन करने के बाद भी इनेलो व जजपा दलित मतदाताओं को साधने में नाकाम रही हैं।
अनुसूचित जाति के आरक्षित चार सीटों पर 2019 में जीत हासिल करने वाली जजपा इस बार शून्य पर आ गई। इस बार आरक्षित सीटों में से 9 पर कांग्रेस और 8 पर भाजपा जीती है। पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा के खाते में 3 और कांग्रेस के खाते में 2 सीटों का इजाफा हुआ है।
राज्य में अनुसूचित जाति के 19 प्रतिशत मतदाता हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में 17 आरक्षित सीटों में से कांग्रेस ने 7, भाजपा ने 5, जजपा ने 4 और निर्दलीय ने एक पर जीत हासिल की थी। इस बार चुनाव में जजपा और निर्दलीय का पत्ता साफ हो गया। भाजपा ने कांग्रेस की 3 और एक निर्दलीय मिलाकर कुल आठ सीटें जीती हैं। वहीं, कांग्रेस ने जजपा की 4 और भाजपा की 1 सीट पर कब्जा जमाते हुए कुल नौ सीटें जीती हैं।
कांग्रेस ने जीती सींटें
मुलाना से कांग्रेस प्रत्याशी पूजा चौधरी, साढौरा से कांग्रेस की रेणु बाला, शाहाबाद से कांग्रेस के रामकरण, गुहला-चीका से कांग्रेस के देवेंद्र हंस, रतिया से कांग्रेस के जरनैल सिंह, कालांवाली से कांग्रेस के शिशपाल केहरवाला, उकलाना से कांग्रेस के नरेश सेलवाल, कलानौर से कांग्रेस की शकुंतला खटक और झज्जर से कांग्रेस की गीता भुक्कल जीती हैं।
भाजपा ने जीती सींटें
नीलोखेड़ी से भाजपा, इसराना से भाजपा के कृष्ण लाल पंवार, खरखौदा से भाजपा के पवन खरखौदा, नरवाना से भाजपा के कृष्ण कुमार, बवानीखेड़ा से भाजपा के कपूर सिंह, बावल से भाजपा के डॉ. कृष्ण कुमार, पटौदी से भाजपा की बिमला चौधरी और होडल से भाजपा के हरिंदर सिंह जीते हैं।